कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के दौरान आज वह दृश्य देखने को मिला, जिसकी कल्पना कम ही की गई थी। राज्य की सबसे हॉट सीट भवानीपुर के चक्रबेरिया में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी एक ही मतदान केंद्र पर आमने-सामने आ गए। दोनों दिग्गजों के बीच की दूरी महज 50 मीटर से भी कम रह गई थी, जिसने इलाके में भारी तनाव और उत्साह दोनों पैदा कर दिया।

गृह क्षेत्र में 'दीदी' की सक्रियता: पहली बार दिखा ऐसा अंदाज

आमतौर पर मतदान के दिन अपने घर पर रहने वाली ममता बनर्जी आज सुबह से ही भवानीपुर के विभिन्न बूथों का सघन दौरा करती नजर आईं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ऐसा पहली बार हुआ है जब ममता ने सुबह से ही खुद कमान संभाल रखी है। चक्रबेरिया के एक बूथ पर जब वह कुर्सी डालकर बैठी थीं, ठीक उसी समय सुवेंदु अधिकारी भी वहां पहुंच गए।

सुवेंदु का प्रहार: "कानून का उल्लंघन कर रही हैं मुख्यमंत्री"

इस आमने-सामने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर तीखा तंज कसा। पत्रकारों से बात करते हुए सुवेंदु ने सवाल उठाया:

"मतदान के दिन बूथों के आसपास BNSS की धारा 163 (निषेधाज्ञा) लागू है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री भारी भीड़ और समर्थकों के साथ घूम रही हैं। क्या उनके लिए नियम अलग हैं?"

ममता का पलटवार: "भाजपा के इशारे पर काम कर रहे ऑब्जर्वर"

वहीं, दूसरी ओर ममता बनर्जी ने भी हार नहीं मानी और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहर से आए कई चुनाव ऑब्जर्वर पूरी तरह भाजपा के एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं। ममता ने दावा किया कि उनके कार्यकर्ताओं को डराया जा रहा है, लेकिन वह मैदान छोड़कर नहीं जाएंगी।

भवानीपुर क्यों है खास?

परंपरा बनाम चुनौती: भवानीपुर ममता बनर्जी का पारंपरिक गढ़ है, लेकिन सुवेंदु अधिकारी की उम्मीदवारी ने यहाँ मुकाबले को बेहद कड़ा और व्यक्तिगत बना दिया है।

साख की लड़ाई: सुवेंदु अधिकारी, जो कभी ममता के खास सिपहसालार थे, अब उन्हें उनके ही घर में चुनौती दे रहे हैं।

सुरक्षा घेरा: दोनों हाई-प्रोफाइल नेताओं के एक ही जगह मौजूद होने के कारण सुरक्षा बलों को खासी मशक्कत करनी पड़ी ताकि कोई हिंसक झड़प न हो।

निष्कर्ष: भवानीपुर की यह तस्वीर बंगाल चुनाव के इस अंतिम चरण की तीव्रता को दर्शाती है। जहाँ एक तरफ ममता अपनी जमीन बचाने की कोशिश में हैं, वहीं सुवेंदु 'जायंट किलर' बनने की पूरी तैयारी में दिख रहे हैं। अब 4 मई के परिणाम ही बताएंगे कि भवानीपुर की जनता ने अपनी 'दीदी' को चुना या 'परिवर्तन' को।