शिमला: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए हिमाचल प्रदेश का बजट पेश किया। बढ़ते कर्ज के बोझ और प्रतिकूल आर्थिक परिस्थितियों के बीच पेश किए गए इस बजट में सरकार ने कड़े फैसले लेते हुए बजट के आकार में कटौती की है। हालांकि, बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री की एक टिप्पणी पर विपक्ष ने ऐसा मोर्चा खोला कि सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
इतिहास में पहली बार: बजट का आकार घटाया
हिमाचल के संसदीय इतिहास में संभवतः यह पहली बार हुआ है जब बजट का आकार बढ़ने के बजाय घटाया गया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पिछले वर्ष के 58,514 करोड़ रुपये के मुकाबले इस बार कुल बजट 54,928 करोड़ रुपये का है। बजट के आकार में 3,586 करोड़ रुपये की यह कटौती प्रदेश की चरमराती अर्थव्यवस्था और बढ़ते वित्तीय घाटे का स्पष्ट संकेत है।
सदन में 'संग्राम': वेल में पहुंचे भाजपा विधायक
मुख्यमंत्री ने सुबह 11:04 बजे अपना बजट भाषण शुरू किया। भाषण के दौरान उन्होंने विपक्ष की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि "विकट परिस्थितियों में विपक्ष ने सरकार का साथ नहीं दिया।" इस बयान पर भाजपा विधायकों ने उग्र विरोध जताया और मुख्यमंत्री पर 'अअसंसदीय भाषा' के प्रयोग का आरोप लगाते हुए सदन के वेल (बीचों-बीच) में आकर नारेबाजी शुरू कर दी।
"शांत होकर बजट सुनें, 35 मिनट विरोध में निकल चुके हैं।" — विधानसभा अध्यक्ष का विपक्षी सदस्यों से आग्रह।
हंगामे को देखते हुए विस अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 11:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। बाद में विवादित शब्दों को बजट रिकॉर्ड से हटाने के निर्देश दिए गए।
बजट की 5 बड़ी बातें: 'ग्रीन बोनस' से 'विश्व युद्ध' तक
संसाधनों का संकट: सीएम सुक्खू ने दोटूक कहा कि व्यर्थ के संस्थानों को बंद करना होगा। उन्होंने केंद्र से मिलने वाली मदद को 'लोन' बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश कर्ज के दलदल में और धंसेगा।
ग्रीन बोनस की मांग: मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि हिमाचल को वनों के संरक्षण के बदले 'ग्रीन बोनस' मिलना चाहिए। उन्होंने रॉयल्टी और बिजली प्रोजेक्ट्स (जो 40 साल पूरे कर चुके हैं) की वापसी न होने पर केंद्र के प्रति नाराजगी जताई।
वैश्विक तनाव का साया: सीएम ने कहा कि दुनिया तीसरे महायुद्ध के मुहाने पर खड़ी है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और आम आदमी का घर चलाना मुश्किल हो गया है।
7 प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस: सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यटन, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण और डाटा स्टोरेज को अपनी प्राथमिकता बताया है।
कर्ज का पहाड़: प्रदेश पर वर्तमान में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण है। हर माह वेतन और पेंशन के लिए ही 2,800 करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है।
सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने बजट की तैयारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विरोधाभासी बातें कर रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर विपक्ष को आपत्ति है तो निलंबन का प्रस्ताव ले आए, लेकिन सदन की कार्यवाही में बाधा न डाले।
विश्लेषण: राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने के बाद यह सरकार का पहला बजट है। सीमित संसाधनों और बढ़ते खर्चों के बीच सुक्खू सरकार के लिए यह साल 'अग्निपरीक्षा' से कम नहीं होने वाला है।





