इंदौर। मालवा के केंद्र और प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के विकास को लेकर इसी सप्ताह एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है। 'उम्मीदों का इंदौर' थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शिरकत करेंगे और शहर के प्रबुद्धजनों के साथ विकास का खाका खींचेंगे। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस भव्य आयोजन को शहर में बढ़ रहे विरोध और अपनों की ही नाराज़गी को शांत करने की एक बड़ी 'कवायद' के तौर पर देखा जा रहा है।

चिट्ठी बम से गरमाई इंदौर की सियासत

दरअसल, यह पूरा मामला तब गरमाया जब कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा मुख्यमंत्री को लिखा गया एक शिकायती पत्र बुधवार सुबह सामने आ गया। सूत्रों के मुताबिक, विजयवर्गीय ने बीते 20 जून को इंदौर की उपेक्षा को लेकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी।

विवाद की शुरुआत 19 जून से हुई, जब राष्ट्रपति के इंदौर आगमन के दौरान नगर निगम द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के पोस्टरों से नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की तस्वीर ही गायब थी। अपने ही विभाग के कार्यक्रम में हुई इस अनदेखी से विजयवर्गीय खेमा खासा नाराज़ हो गया। उनके समर्थक पार्षद मनीष मामा ने इस मुद्दे को महापौर परिषद (MIC) की बैठक में भी ज़ोर-शोर से उठाया।

मेट्रोपॉलिटन सिटी से नाम गायब होने पर जनता में आक्रोश

सिर्फ पोस्टर ही नहीं, बल्कि इंदौर को मेट्रोपॉलिटन सिटी के दर्जे की रेस में प्राथमिकता न दिए जाने के बाद से ही इंदौर की जनता और विभिन्न सामाजिक संगठनों में सरकार के प्रति गहरा आक्रोश है। मंत्री विजयवर्गीय की चिट्ठी ने जनता के इस सुलगते गुस्से में घी डालने का काम किया, जिसके बाद सरकार बैकफुट पर आ गई।

सांसद लालवानी ने संभाली कमान, रूठों को मनाने की कोशिश

चिट्ठी बम के बाद से ही भोपाल से लेकर इंदौर तक के राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में इस महाआयोजन की रूपरेखा तैयार की गई। आयोजन की पूरी ज़िम्मेदारी इंदौर सांसद शंकर लालवानी संभाल रहे हैं। तैयारियों को लेकर मंगलवार को एक उच्च स्तरीय बैठक भी बुलाई गई थी। सांसद लालवानी इस संबंध में मुख्यमंत्री से विस्तृत चर्चा कर चुके हैं।

आयोजन का मुख्य उद्देश्य: शहर के गणमान्य नागरिकों, बुद्धिजीवियों और असंतुष्ट धड़ों को एक मंच पर लाकर यह संदेश देना है कि सरकार इंदौर के विकास को लेकर पूरी तरह गंभीर है।

अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में होने वाला यह 'उम्मीदों का इंदौर' आयोजन, शहरवासियों के गुस्से और अपनों की सियासी नाराज़गी को शांत करने में कितना कामयाब हो पाता है।