कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का पहला सीधा प्रहार भारतीय आम आदमी की जेब पर हुआ है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने शनिवार से घरेलू रसोई गैस (14.2 किग्रा) के दामों में ₹60 की वृद्धि कर दी है। यह चालू वित्त वर्ष में कीमतों में दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है, जिसके बाद दरें पिछले 30 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई हैं।
कोलकाता और व्यावसायिक दरें
घरेलू सिलेंडर: कोलकाता में अब उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर के लिए ₹879 के बजाय ₹939 चुकाने होंगे।
कमर्शियल गैस: होटल और रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाले 19 किग्रा के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत भी ₹1,875.50 से बढ़कर ₹1,990 हो गई है।
बुकिंग के लिए 21 दिनों का 'वेटिंग पीरियड' अनिवार्य
आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता बनाए रखने और घबराहट में होने वाली 'पैनिक बुकिंग' को रोकने के लिए तेल कंपनियों ने सख्त कदम उठाए हैं:
नया नियम: अब एक रिफिल सिलेंडर बुक करने के बाद अगले सिलेंडर के लिए 21 दिनों का अनिवार्य अंतराल (Wait Period) रखना होगा।
वजह: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के एक अधिकारी के अनुसार, कीमतों में वृद्धि की आहट से बुकिंग में 1.8 से 1.9 गुना का उछाल देखा गया था। सट्टेबाजी वाली बुकिंग को रोकने के लिए यह 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' लागू किया गया है।
आपूर्ति का संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य
ईरान युद्ध के कारण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही ठप होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बढ़ा है।
आयात पर निर्भरता: भारत अपनी वार्षिक एलपीजी खपत (31.3 मिलियन टन) का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। आयातित गैस का 85-90% हिस्सा सऊदी अरब जैसे देशों से आता है, जो इसी समुद्री मार्ग का उपयोग करते हैं।
आपातकालीन निर्देश: केंद्र सरकार ने आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करते हुए सभी रिफाइनरियों को घरेलू एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है।
ममता बनर्जी का विरोध प्रदर्शन
कीमतों में इस वृद्धि को लेकर राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले को "जनविरोधी" (Anti-people) करार दिया है। उन्होंने इसके विरोध में आज यानी रविवार को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
विपक्ष का आरोप है कि युद्ध के बहाने आम जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, जिससे मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों का बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा।





