कुरुक्षेत्र (पिहोवा): हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के पिहोवा में कथित धान घोटाले की आग अब और धधक गई है। बुधवार को दो ऑडियो वायरल होने के बाद गुरुवार को एक तीसरे ऑडियो ने पूरे प्रशासनिक और राइस मिलर गलियारे में खलबली मचा दी है। इस नए ऑडियो में फिजिकल वेरिफिकेशन (PV) टीम को प्रभावित करने के लिए 'सेटिंग' और 'गुप्त मीटिंग' का जिक्र है।
क्या है वायरल ऑडियो में?
मिलर एसोसिएशन के एक व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किए गए इस ऑडियो संदेश में सभी मिलरों को सुबह 11:15 बजे 'अंबे राइस मिल' में एकत्रित होने का निर्देश दिया गया है।
'सख्त' टीम का डर: ऑडियो में कहा गया है कि फिजिकल वेरिफिकेशन (PV) करने आई टीम "थोड़ी सख्त" है, इसलिए सभी मिलर एकजुट होकर वहां पहुंचें ताकि टीम के साथ 'बातचीत' की जा सके।
रिश्वत का 'रेट' तय: सूत्रों के अनुसार, इस बैठक के दौरान कथित तौर पर प्रति राइस मिल 15,000 रुपये की राशि तय करने की बात सामने आई है, ताकि वेरिफिकेशन प्रक्रिया को मनमुताबिक बदला जा सके।
आरोपों के घेरे में सतीश सिंगला: सफाई और इनकार
तीसरे ऑडियो में अंबे राइस मिल के मालिक सतीश सिंगला का नाम प्रमुखता से लिया गया है। हालांकि, सिंगला ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है:
"मेरा अंबे राइस मिल से कोई संबंध नहीं है। वह मिल 10 साल पहले ही बंद हो चुकी है। मेरी अपनी मिल 'गणपति' के नाम से है, जिसकी जांच पहले ही पूरी हो चुकी है। ऑडियो में जिस सतीश का नाम है, वह कोई और हो सकता है।"
प्रशासनिक और एसोसिएशन की प्रतिक्रिया
| पक्ष | मुख्य बयान |
|---|---|
| डीएफएससी (नरेश कुमार) | मामला अभी संज्ञान में नहीं है। शिकायत मिलने पर जांच और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। टीम नियमित रूप से अपना काम कर रही है। |
| मिलर एसोसिएशन (सतीश सैनी) | आज के एआई (AI) दौर में किसी की भी आवाज में फर्जी ऑडियो बनाना संभव है। इन वायरल संदेशों की सत्यता संदिग्ध है। |
बढ़ती जा रही है जांच की मांग
धान खरीद और भंडारण में अनियमितताओं को लेकर पिछले दो दिनों में कुल तीन ऑडियो सामने आ चुके हैं। इनमें अधिकारियों और मिलरों के बीच कथित मिलीभगत के संकेत मिले हैं। भले ही एसोसिएशन इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का खेल बता रही हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि फिजिकल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को प्रभावित करने की बड़ी कोशिश की जा रही थी।
मुख्य बिंदु:
पिहोवा में पीवी टीम में सुपरिंटेंडेंट बलवान सिंह, इंस्पेक्टर अंकुर जांगड़ा और एएफएसओ चरणजीत सिंह शामिल हैं।
सरकार की ओर से अभी तक किसी आधिकारिक कार्रवाई या एफआईआर की पुष्टि नहीं हुई है।
लगातार वायरल हो रहे ऑडियो ने विभाग की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।





