राँची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर राज्य में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लाखों विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) का मुद्दा उठाया है। सीएम सोरेन ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार से मांग के अनुरूप छात्रवृत्ति का फंड नहीं मिल रहा है, जिससे सुयोग्य छात्रों को समय पर राशि उपलब्ध कराने में गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
मुख्यमंत्री द्वारा पत्र में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में राज्य की मांगों के मुकाबले केंद्र से मिली राशि में भारी अंतर रहा है:
वर्ष 2024 (प्री-मैट्रिक): 66.14 करोड़ रुपये की मांग के मुकाबले महज 12.61 करोड़ रुपये मिले।
वर्ष 2025 (प्री-मैट्रिक): 45.91 करोड़ रुपये की मांग के मुकाबले केवल 3.95 करोड़ रुपये ही स्वीकृत हुए।
वर्ष 2024 (पोस्ट-मैट्रिक): 353.21 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, जिसके एवज में सिर्फ 33.57 करोड़ रुपये ही राज्य को प्राप्त हुए।
JMM का हमला: "सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य कर रहा प्रयास"
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि यह विषय सीधे तौर पर गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने कहा:
"मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्रियों द्वारा कई बार लिखित व मौखिक तौर पर केंद्र का ध्यान खींचा गया, लेकिन बकाया राशि नहीं जारी की गई। राज्य सरकार के पास सीमित संसाधन हैं, फिर भी वह अपने स्तर से मदद का प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार का रवैया छात्रों के प्रति असहयोगात्मक है।"
कांग्रेस का समर्थन: "सीएम ने छात्रों के दर्द को कलमबद्ध किया"
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने कहा कि यह पत्र केवल एक प्रशासनिक पत्राचार नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों विद्यार्थियों की भावनाओं का प्रकटीकरण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने अपने हिस्से का अंशदान दे दिया है, लेकिन जब तक केंद्र सरकार अपना केंद्रीय अंशदान जारी नहीं करती, तब तक छात्रवृत्ति का वितरण पूरा होना संभव नहीं है।
बीजेपी का पलटवार: "भ्रम फैलाने और नैरेटिव सेट करने की कोशिश"
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और विधायक सीपी सिंह ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा:
नियमों के तहत मिलता है फंड: "यदि मांग नियमानुकूल और वैध होगी, तो केंद्र सरकार अवश्य राशि जारी करेगी। केंद्र कभी किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं करता।"
जनता को गुमराह करने का आरोप: "राज्य सरकार एक विशेष एजेंडा चलाती है। पिछले चुनाव के समय भी 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये के बकाये का मुद्दा उछाला गया था, जिसकी चर्चा अब बंद हो चुकी है। यह सब जनता को बरगलाने और राजनीतिक नैरेटिव बनाने का हिस्सा है।"





