पटना | राज्य ब्यूरो बिहार में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्याओं के विरुद्ध राज्य सरकार ने अब निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के सख्त निर्देश के बाद बिहार के गृह विभाग ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस कप्तानों (SSP/SP) को पहचान और निर्वासन (Deportation) की प्रक्रिया तेज करने का आदेश जारी किया है।

सीमाई जिलों की बदलती डेमोग्राफी पर केंद्र की नजर

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बिहार के सीमाई जिलों की जनसांख्यिकी (Demography) में आ रहे बदलावों की समीक्षा की गई थी। आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिलों में जनसंख्या संतुलन में असामान्य बदलाव देखा गया है। अनुमान है कि बिहार के विभिन्न हिस्सों में लगभग 25 से 30 लाख अवैध घुसपैठिये रह रहे हैं। इसी चिंता को देखते हुए अब इन्हें चिह्नित कर वापस भेजने की रणनीति तैयार की गई है।

प्रक्रिया और सख्त निगरानी के मुख्य बिंदु

गृह विभाग के अपर सचिव, मो. शादाब मुस्ताक द्वारा जारी पत्र के अनुसार, इस अभियान को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा:

विशेष टास्क फोर्स का गठन: प्रत्येक जिले में अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए स्पेशल टास्क फोर्स बनाई जाएगी।

बायोमीट्रिक पंजीकरण: डिपोर्ट किए जाने वाले हर व्यक्ति का बायोमीट्रिक डेटा लिया जाएगा, जिसे सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। इससे भविष्य में उनके दोबारा घुसपैठ करने की संभावना को समाप्त किया जा सके।

मासिक रिपोर्टिंग: इस पूरी कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट हर महीने केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।

सीमा सुरक्षा बल को सुपुर्दगी: पहचान सुनिश्चित होने के बाद, इन नागरिकों को विधिवत प्रक्रिया के तहत बांग्लादेश और म्यांमार की सीमाओं पर तैनात सुरक्षा बलों को सौंप दिया जाएगा।

नई बांग्लादेश सरकार के गठन के बाद बढ़ी सतर्कता

पड़ोसी देश बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के बाद उत्पन्न स्थितियों को देखते हुए भारत सरकार ने सीमाओं पर निगरानी और देश के भीतर अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की जांच सघन कर दी है। बिहार सरकार का यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

"अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें डिपोर्ट करना हमारी प्राथमिकता है। जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे मानवीय गरिमा का ध्यान रखते हुए कानून सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करें।" > — गृह विभाग, बिहार शासन