भोपाल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित रवींद्र भवन में आयोजित 'लोकतंत्र सेनानी प्रादेशिक सम्मेलन' में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आपातकाल (Emergency) के दौरान जेल जाने वाले मीसाबंदियों और लोकतंत्र सेनानियों के लिए घोषणाओं का पिटारा खोल दिया। मुख्यमंत्री ने फूलों की बारिश कर बुजुर्ग लोकतंत्र सेनानियों का भव्य अभिनंदन किया और उनके त्याग को देश के लिए ऐतिहासिक बताया।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने 1975 में कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल की कड़े शब्दों में निंदा की और उस दौर को देश का सबसे चुनौती भरा समय करार दिया।
मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणाएं: एक नजर में
लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों को सम्मान व सुरक्षा देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं का ऐलान किया है, जिन्हें नीचे दिए गए मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है:
विशेष तीर्थाटन ट्रेन: आपातकाल के दौरान संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को सरकार अपने खर्च पर तीर्थ यात्रा कराएगी, जिसके लिए एक स्पेशल ट्रेन शुरू की जाएगी।
फ्री एयर एंबुलेंस और इलाज: सेनानियों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी उठाते हुए मुख्यमंत्री ने उनके लिए मुफ्त इलाज और आपात स्थिति में 'फ्री एयर एंबुलेंस' की सुविधा देने की घोषणा की।
सर्किट हाउस में मुफ्त ठहराव: अब प्रदेश के सभी सरकारी रेस्ट हाउस और सर्किट हाउस में लोकतंत्र सेनानी दो दिनों तक बिना कोई शुल्क दिए (निःशुल्क) ठहर सकेंगे।
वंचितों को ताम्रपत्र: जो लोकतंत्र सेनानी किन्हीं कारणों से अब तक 'ताम्रपत्र' प्राप्त करने से वंचित रह गए हैं, उन्हें जल्द ही सरकार ताम्रपत्र देकर सम्मानित करेगी।
अमर सेनानियों के नाम पर होंगे गांवों के पार्क और मैदान
दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों की यादों को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि:
"शहीद और दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों के गृह ग्राम और कस्बों में विशेष शिलालेख (मेमोरियल स्टोन) स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही स्थानीय पार्कों, प्रमुख मार्गों और खेल के मैदानों का नामकरण भी इन्हीं लोकतंत्र सेनानियों के नाम पर किया जाएगा।"
"न वकील, न अपील, न दलील" — मुख्यमंत्री का कांग्रेस पर तीखा तंज
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि उस समय देश का माहौल बेहद खौफनाक था।
सीएम का बयान: "आपातकाल के दौरान घर के मुखिया को उठाकर सीधे जेल में बंद कर दिया जाता था। उसके बाद न कोई वकील था, न अपील और न ही कोई दलील। पीछे परिवार बेसहारा हो जाता था कि बच्चे स्कूल कैसे जाएंगे, घर कौन चलाएगा? जेलों में बंद मीसाबंदियों पर दबाव बनाया जाता था कि कांग्रेस में शामिल हो जाओ और इंदिरा गांधी की जय-जयकार करो तो छोड़ देंगे, लेकिन हमारे जांबाज सेनानी झुके नहीं।"
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि कांग्रेस की नीति और विचारधारा में आज भी कोई सुधार नहीं आया है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में तबाह होने वाला जापान आज कहां से कहां पहुंच गया, लेकिन कांग्रेस ने हमेशा देश के विकास की लड़ाई को रोकने का प्रयास किया।
"इसी संघर्ष की बदौलत आज गरीब का बेटा प्रधानमंत्री है"
डॉ. मोहन यादव ने भावुक होते हुए कहा कि लोकतंत्र सेनानियों का यह संघर्ष देश की स्वतंत्रता की पहली लड़ाई के ही समान है। अगर उस समय इन लोगों ने लाठियां और जेलें न झेली होतीं, तो आज देश में लोकतंत्र सुरक्षित नहीं रहता। उन्होंने कहा कि यह इसी ऐतिहासिक संघर्ष का परिणाम है कि आज एक बेहद गरीब परिवार से निकला हुआ व्यक्ति भी देश के सर्वोच्च पद यानी प्रधानमंत्री पद पर आसीन हो सकता है।





