श्रीनगर: पिछले वर्ष पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी चार्जशीट में एक चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा किया है। चार्जशीट के मुताबिक, इस कायराना हमले में इस्तेमाल किए गए घातक हथियार और रसद नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार यानी पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए गिराए गए थे। इस आतंकी हत्याकांड में 26 बेकसूर लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
एनआईए की इस तफ्तीश ने सीमा पार से रची जा रही साजिशों और आतंकियों के नए तौर-तरीकों को बेनकाब कर दिया है।
सुरक्षा घेरा तोड़ बारामुला के जंगलों में गिराई खेप
जांच रिपोर्ट के अनुसार, एलओसी पर भारतीय सेना की भारी मुस्तैदी को देखते हुए पाकिस्तानी एजेंसियों ने घुसपैठ के पारंपरिक रास्तों को छोड़कर तकनीक का सहारा लिया है। चार्जशीट में बताया गया है कि:
सुरक्षा घेरे को चकमा देकर ये हथियार बारामुला के गोगल डोरा के घने जंगलों में ड्रोन द्वारा गिराए गए थे।
जंगलों में गिरी यह खेप सीधे आतंकियों के स्थानीय मददगारों (ओजीडब्ल्यू) तक पहुंच गई।
बरामद सामान में 20 चीनी पिस्टल, 15 लाख रुपये की नकदी और अत्याधुनिक चीनी ड्रोन शामिल थे।
विशेषज्ञों की चिंता: 'टेक्निकल' पर निर्भरता बढ़ी, 'ह्यूमन नेटवर्क' हुआ कमजोर
इस खुलासे के बाद सुरक्षा विशेषज्ञों ने घाटी में सुरक्षा तंत्र को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2022 से 2024 के बीच ह्यूमन इंटेलिजेंस (जमीनी स्तर पर गुप्त सूचनाएं जुटाना) में कमी आई है। केवल तकनीकी सूचनाओं पर अत्यधिक निर्भरता के कारण आतंकी कश्मीर घाटी और पीर पंजाल क्षेत्र में आसानी से घूमते रहे।
"पहले गुज्जर-बक्करवाल समुदाय के लोग पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों की 'आंख और कान' हुआ करते थे। ग्राउंड इंटेलिजेंस कमजोर होने का ही नतीजा है कि आतंकी बैसरन घाटी में वारदात को अंजाम देने से काफी पहले स्थानीय लोगों के बीच घुल-मिल गए और सुरक्षाबलों को भनक तक नहीं लगी।" — सुरक्षा विशेषज्ञ
एनआईए ने चार्जशीट में आतंकियों का पूरा रूट मैप भी साझा किया है, जिससे साफ है कि वे दुर्गम पर्वतीय रास्तों और शहरी इलाकों से गुजरे, लेकिन किसी की नजर में नहीं आए।
एक्शन में सुरक्षाबल: अमरनाथ यात्रा से पहले कड़ा पहरा
इस बीच, आगामी अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा को अभेद्य और चाक-चौबंद बनाने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
सोमवार को सुरक्षाबलों ने कुलगाम से लेकर गांदरबल तक एक बड़ा संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। इस ऑपरेशन के दौरान कई संदिग्ध ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को चिह्नित कर पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है, ताकि आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।





