चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने निवास पर ग्रामीण विकास व पंचायत विभाग के 4 वर्षों के कार्यों का लेखा-जोखा पेश करते हुए राज्य के भविष्य के लिए नई दिशा तय की है।
1. ग्रामीण जातीय सर्वेक्षण: जमीन, आय और नशे का हिसाब
पंजाब की 13,236 पंचायतों में आज से एक व्यापक सर्वे शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य केवल जातिगत आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक बुराइयों की गहराई तक पहुँचना है।
प्रमुख बिंदु: किस जाति के पास कितनी जमीन है, उनकी वार्षिक आय कितनी है, और क्या परिवार में कोई व्यक्ति ड्रग्स का आदी है?
नशे पर प्रहार: यदि कोई नशे का सेवन कर रहा है, तो वह किस प्रकार का नशा है, इसकी जानकारी जुटाई जाएगी ताकि सरकारी नीतियों को उसी अनुरूप ढाला जा सके।
2. खेती के लिए 'अंडरग्राउंड बिजली': सतौज से शुरुआत
मुख्यमंत्री ने अपने पैतृक गांव सतौज (संगरूर) से एक क्रांतिकारी प्रयोग शुरू करने की घोषणा की है।
समस्या का समाधान: खेतों के ऊपर से गुजरने वाली हाई-वोल्टेज लाइनों से अक्सर शॉर्ट सर्किट के कारण फसलें जल जाती हैं और बिजली के खंभों को लेकर किसानों के बीच आपसी विवाद होते हैं।
योजना: इन लाइनों को जमीन के नीचे (Underground) बिछाया जाएगा। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे पूरे पंजाब में लागू किया जाएगा।
3. आढ़तियों को 'ब्लैकमेलिंग' न करने की चेतावनी
गेहूं खरीद सीजन की शुरुआत के साथ ही हड़ताल की धमकी देने वाले आढ़तियों को सीएम मान ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है।
कड़ा रुख: मुख्यमंत्री ने कहा कि आढ़तियों की मांगें केंद्र सरकार से जुड़ी हैं, ऐसे में राज्य सरकार को 'ब्लैकमेल' करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीजन के समय किसानों को परेशानी हुई, तो सरकार सख्ती से निपटेगी।
4. हिमाचल के 'एंट्री टैक्स' पर कांग्रेस को घेरा
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बाहरी गाड़ियों पर लगाए गए एंट्री टैक्स को लेकर सीएम मान ने पंजाब कांग्रेस पर निशाना साधा।
तर्क: उन्होंने कहा कि हम पंजाब में टोल टैक्स बंद कर रहे हैं जिसका फायदा हिमाचल की गाड़ियों को भी होता है, लेकिन बदले में हिमाचल सरकार टैक्स वसूल रही है। उन्होंने तंज कसा कि पंजाब के कांग्रेसी नेता अपने ही दल की हिमाचल सरकार से इस पर बात क्यों नहीं करते?
विकास का तुलनात्मक ब्यौरा (पिछले 4-5 साल)
| सरकार | कार्यकाल | ग्रामीण विकास पर खर्च |
|---|---|---|
| कांग्रेस सरकार | 5 वर्ष | ₹1,883 करोड़ |
| आप (AAP) सरकार | 4 वर्ष | ₹3,847 करोड़ |
निष्कर्ष: भगवंत मान सरकार का यह सर्वे पंजाब के ग्रामीण ढांचे को समझने और नशे जैसी गंभीर समस्या के समाधान के लिए एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश है। वहीं, बिजली लाइनों को अंडरग्राउंड करना किसानों की सुरक्षा के लिहाज से एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।





