कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि बंगाल में फर्जी मतदाताओं को जोड़ने और वास्तविक वोटरों के नाम हटाने की एक संगठित कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ एक "बड़ी साजिश" करार दिया है।

1. फर्जी फॉर्म-6 और बाहरी वोटरों का मुद्दा

ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर भाजपा (BJP) का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि:

हजारों की संख्या में फर्जी फॉर्म-6 आवेदन जमा किए जा रहे हैं।

इन आवेदनों के जरिए बाहरी लोगों (Non-residents) के नाम बंगाल की मतदाता सूची में शामिल करने की कोशिश हो रही है।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस तरह की 'रणनीति' का प्रयोग पहले महाराष्ट्र और दिल्ली के चुनावों में भी किया जा चुका है।

2. SIR प्रक्रिया और 60 लाख मतदाताओं का संकट

मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की सत्यापन प्रक्रिया (SIR) पर कड़े सवाल उठाए हैं:

जांच में फंसे वोटर: उन्होंने कहा कि लगभग 60 लाख से अधिक वास्तविक मतदाता अभी भी जांच प्रक्रिया के कारण अधर में लटके हैं।

फर्जी आवेदनों को प्राथमिकता: आरोप है कि जहां वास्तविक वोटरों की प्रक्रिया धीमी है, वहीं फर्जी आवेदनों को तेजी से स्वीकार किया जा रहा है।

गंभीर दावा: ममता बनर्जी ने पत्र में एक चौंकाने वाला दावा किया कि इस जटिल प्रक्रिया के तनाव और कारणों से अब तक 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

3. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला

मुख्यमंत्री ने पत्र में स्पष्ट किया कि वर्तमान में अपनाई जा रही प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के स्थापित दिशा-निर्देशों के खिलाफ है। उन्होंने चुनाव आयोग से निम्नलिखित मांगें की हैं:

अंतिम सूची का सम्मान: 28 फरवरी 2026 को जो अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित हुई थी, उसे ही आधार माना जाए।

नए नामों पर रोक: उस सूची के बाद किसी भी नए नाम को शामिल करने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए ताकि चुनावी शुचिता बनी रहे।

चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से तुरंत कार्रवाई करने की अपील करते हुए कहा कि बंगाल की जनता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। उन्होंने इस कथित गड़बड़ी को रोकने के लिए आयोग से निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग की है।

निष्कर्ष: चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री का यह पत्र बंगाल की राजनीतिक सरगर्मी को और तेज कर सकता है। जहाँ टीएमसी इसे लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बता रही है, वहीं आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और विपक्षी दलों (विशेषकर भाजपा) का रुख इस विवाद को नई दिशा देगा।