नई दिल्ली: मणिपुर जातीय हिंसा मामलों की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने न्याय प्रक्रिया को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए कई ऐतिहासिक निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पीड़ितों तक उसकी पहुँच भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

निगरानी समिति के खर्चों पर जताई नाराजगी

न्यायालय ने अगस्त 2023 में गठित जस्टिस गीता मित्तल समिति के सदस्यों को पिछले दो वर्षों से यात्रा और कार्य संबंधी खर्चों का भुगतान न किए जाने पर गहरी चिंता और असंतोष व्यक्त किया।

अंतरिम भुगतान: न्यायालय ने समिति के तीनों सदस्यों में से प्रत्येक को 10 लाख रुपये का तत्काल भुगतान करने का निर्देश दिया है।

मानदेय: पीठ ने स्पष्ट किया कि यह राशि केवल तात्कालिक खर्चों के लिए है; सदस्यों का मानदेय (Honorarium) बाद में अलग से तय किया जाएगा।

पीड़ितों को मिलेगी चार्जशीट की कॉपी

वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर की दलीलों पर संज्ञान लेते हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि पीड़ितों को केस की प्रगति के बारे में कोई जानकारी नहीं है, न्यायालय ने निर्देश दिया:

CBI और SIT अब हिंसा से प्रभावित पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ दाखिल की गई चार्जशीट की कॉपी साझा करेंगे।

महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी दत्तात्रेय पडसलगीकर की रिपोर्ट के अनुसार, 20 मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, जबकि शेष 6 मामलों की जांच अगले 6 महीनों में पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

गुवाहाटी ट्रायल के लिए विशेष कानूनी सहायता

चूंकि मामलों का ट्रायल मणिपुर से असम (गुवाहाटी) स्थानांतरित कर दिया गया है, इसलिए न्यायालय ने पीड़ितों की आर्थिक और कानूनी मदद के लिए मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) को आदेश दिए हैं:

यात्रा एवं आवास का खर्च: गुवाहाटी जाने वाले लीगल एड वकीलों और प्रत्येक पीड़ित परिवार के एक सदस्य के आने-जाने और रहने का खर्च SLSA उठाएगा।

वकीलों की भूमिका: लीगल एड वकील विशेष ट्रायल कोर्ट में अभियोजन पक्ष की सहायता करने या स्वतंत्र रूप से पक्ष रखने के हकदार होंगे।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग: सुरक्षा कारणों से पीड़ितों को गुवाहाटी कोर्ट के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बयान दर्ज कराने की सुविधा मिलती रहेगी।

न्यायालय की टिप्पणी: "पीड़ितों और उनके परिवारों को मामलों की सुनवाई कर रहे विशेष कोर्ट के सामने अपनी सभी शिकायतें उठाने की पूरी आजादी होगी।"

मुख्य बिंदुओं पर एक नज़र:

विषयन्यायालय का निर्देश
निगरानी समितिप्रत्येक सदस्य को 10 लाख रुपये का अंतरिम भुगतान।
जांच की समयसीमाशेष 6 FIR की जांच 6 महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य।
कानूनी हकपीड़ितों को चार्जशीट की प्रति अनिवार्य रूप से देना।
सहायतागुवाहाटी आने-जाने का खर्च और मुफ्त वकील की सुविधा।