कटक, ओडिशा ओडिशा के प्रतिष्ठित और सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान, SCB मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से आज एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। अस्पताल के ट्रॉमा केयर विभाग में आज तड़के भीषण आग लग गई, जिसकी चपेट में आने से अस्पताल में उपचाराधीन 10 मरीजों की मौत हो गई। इस हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है।
देर रात मची अफरा-तफरी
घटना उस समय की है जब अस्पताल के वार्ड में मरीज और उनके परिजन गहरी नींद में थे। अचानक भड़की आग ने कुछ ही पलों में विकराल रूप धारण कर लिया। धुआं और आग की लपटें देख अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। पुलिस कमिश्नर के अनुसार, ट्रॉमा केयर ICU में उस समय कुल 23 मरीज भर्ती थे।
राहत और बचाव कार्य
आग की सूचना मिलते ही अस्पताल की आंतरिक फायर यूनिट और अग्निशमन विभाग की तीन दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। भारी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। धुएं के गुबार के बीच ICU में भर्ती गंभीर मरीजों को तुरंत न्यू मेडिसिन ICU और अन्य सुरक्षित वार्डों में स्थानांतरित किया गया। हालांकि, स्थानांतरण के दौरान और धुएं के कारण 10 मरीजों की जान नहीं बचाई जा सकी। 5 अन्य मरीजों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
शोक की लहर: मृतकों की सूची
प्रशासन ने हादसे में जान गंवाने वाले 10 नागरिकों की पहचान साझा की है:
रमेश चंद्र परिडा, दासरू मुंडा, एमडी नयूम, गौरांग चंद्र बारिक, सेख अब्दुल सतर, मधुसूदन दलाई, कृष्ण चंद्र बिस्वाल, रविंद्र दास, चेरू परिडा और मेनका राउत।
मुख्यमंत्री का दौरा और बड़ी घोषणाएं
हादसे की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी स्वयं अस्पताल पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:
आर्थिक सहायता: प्रत्येक मृतक के परिजन को 25 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
न्यायिक जांच: घटना की निष्पक्षता से जांच के लिए न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
कठोर कार्रवाई: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
उठते सवाल और जन आक्रोश
राज्य के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा मानकों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। बुद्धिजीवी वर्ग और स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि आखिर बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं? शुरुआती कयासों में शॉर्ट सर्किट को आग का कारण माना जा रहा है, लेकिन वास्तविक कारणों का खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो पाएगा।
वर्तमान में अस्पताल प्रशासन स्थिति को सामान्य करने में जुटा है और शेष मरीजों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।





