भोपाल:
अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस (International MSME Day) के ऐतिहासिक अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के औद्योगिक, सामाजिक और युवाओं के विकास को लेकर कई अभूतपूर्व घोषणाएं की हैं। भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित 'सशक्त उद्यमी-समृद्ध मध्यप्रदेश समिट' को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि प्रदेश का आगामी 'ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट' (GIS) जनवरी में राजधानी भोपाल में आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 2027 को पूर्ण रूप से 'युवा कल्याण वर्ष' के रूप में मनाने की एक बड़ी घोषणा की है।
सिंगल क्लिक से करोड़ों की वित्तीय सहायता जारी
समिट के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने के लिए सिंगल क्लिक के माध्यम से 760 से अधिक एमएसएमई (MSME) इकाइयों को प्रोत्साहन राशि सीधे उनके खातों में जारी की। इसके अलावा, 'मध्यप्रदेश निवेश प्रोत्साहन योजना' के अंतर्गत बड़े व वृहद उद्योगों को 1,274 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई, जिससे प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे.
जानिए सरकार का 'इयरली विज़न': किस साल को क्या नाम मिला?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकार का रोडमैप साझा करते हुए बताया कि हर वर्ष को एक विशेष कल्याणकारी विज़न के रूप में समर्पित किया जा रहा है:
वर्ष 2024: गरीब कल्याण वर्ष के रूप में मनाया गया।
वर्ष 2025: उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में समर्पित रहा।
वर्ष 2026 (कृषक कल्याण वर्ष): वर्तमान वर्ष को किसानों के नाम किया गया है। इसके तहत कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाया जा रहा है। किसानों को शून्य ब्याज दर पर लोन देने के साथ-साथ ऋण चुकाने के लिए 12 महीने की नई समय-सीमा दी गई है और 31 मार्च की पुरानी बाध्यता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
वर्ष 2027 (युवा कल्याण वर्ष): आगामी वर्ष पूरी तरह युवाओं के रोजगार, कौशल और कल्याण पर केंद्रित रहेगा।
विदेशी निवेश की लंबी छलांग; 9 लाख करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर
मध्य प्रदेश में वैश्विक कंपनियों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि कनाडा की मैकमैन कंपनी आगर मालवा में, और यूके (UK) की दो बड़ी कंपनियां पीथमपुर में निवेश कर रही हैं। इनके अलावा जापान, चीन, आयरलैंड और दक्षिण कोरिया की कंपनियां भी प्रदेश का रुख कर चुकी हैं। अब तक हुए एमओयू (MoU) में से 9,300 करोड़ रुपये का निवेश सीधे धरातल पर आ चुका है।
वहीँ, मुख्य सचिव अनुराग जैन ने समिट में एक बड़ा आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान मिले निवेश प्रस्तावों में से 9 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। इसी का परिणाम है कि मध्य प्रदेश ने एमएसएमई उत्पादों के निर्यात में एक वर्ष के भीतर 4 पायदान की लंबी छलांग लगाकर देश में 11वां स्थान हासिल कर लिया है।
एमएसएमई में बढ़ी 'नारी शक्ति' और 20 उत्पादों को मिला GI टैग
प्रदेश में महिला उद्यमिता के मोर्चे पर भी शानदार प्रगति हुई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में 4 लाख 41 हजार से अधिक एमएसएमई यूनिट्स की कमान महिला उद्यमियों के हाथों में है। वर्ष 2024 से 2026 के बीच एमएसएमई क्षेत्र में नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व 59 प्रतिशत तक बढ़ा है। एक और बड़ी उपलब्धि का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश के 20 स्थानीय उत्पादों को प्रतिष्ठित जीआई टैग (GI Tag) हासिल हुआ है, जिससे उन्हें वैश्विक पहचान मिली है।
बजट हुआ दोगुना; उद्योगों के लिए मिलेंगे 3000 नए भूखंड
कार्यक्रम में मौजूद एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप ने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विभाग का बजट 1100 करोड़ रुपये से सीधे बढ़ाकर 2100 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पिछले एक साल में उद्योगों के लिए लगभग 1200 भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं और अगले डेढ़ साल में 3000 और नए भूखंड आवंटित किए जाएंगे।
इसी सौगात के तहत देवास, पांढूर्ना, टीकमगढ़ और उज्जैन को नए एमएसएमई भवन मिले हैं, जबकि मंदसौर, मंडला, जबलपुर, बैतूल, कटनी, नीमच और खरगोन के औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को और मजबूत किया जा रहा है। यह समिट मध्य प्रदेश को देश का अग्रणी औद्योगिक हब बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।





