नई दिल्ली:

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक 'भुगतान में देरी' (Delayed Payments) और वर्किंग कैपिटल की कमी है। माल या सेवाओं की सप्लाई के बाद 30 से 60 दिनों या उससे अधिक समय तक पैसा फंसे रहने से कारोबार का दैनिक संचालन प्रभावित होता है। MSME सेक्टर की इसी समस्या को स्थायी रूप से हल करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा TReDS (Trade Receivables Discounting System) प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है।

यह एक RBI-रेगुलेटेड इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से MSME अपने बकाए इनवॉइस को डिस्काउंट पर फाइनेंस कराकर भुगतान तिथि से पहले ही नकदी प्राप्त कर सकते हैं।

TReDS कैसे काम करता है? (उदाहरण से समझें)

RBI के नियमानुसार, TReDS प्लेटफॉर्म पर मुख्य रूप से तीन पक्ष शामिल होते हैं: MSME (सप्लायर), बायर्स (बड़ी कंपनियां/खरीददार) और फाइनेंसर (बैंक व वित्तीय संस्थान)।

  1. इनवॉइस अपलोड करना: यदि किसी MSME ने किसी बड़ी कंपनी को ₹10 लाख का सामान सप्लाई किया है और भुगतान 60 दिनों के बाद होना है, तो MSME उस इनवॉइस को TReDS प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर देता है।
  2. फाइनेंसर्स की बोली: प्लेटफॉर्म पर मौजूद अधिकृत फाइनेंसर (बैंक/NBFC) उस इनवॉइस को डिस्काउंट पर फाइनेंस करने के लिए बोली (Bid) लगाते हैं।
  3. तत्काल भुगतान: MSME अपनी सुविधानुसार सबसे बेहतर बोली को चुनता है और फाइनेंसर से तुरंत भुगतान प्राप्त कर लेता है।
  4. अंतिम भुगतान: जब इनवॉvis की निर्धारित भुगतान तारीख (Due Date) आती है, तो बायर (खरीददार कंपनी) सीधे उस फाइनेंसर को पूरा भुगतान कर देता है।
'Without Recourse' की सुरक्षा: TReDS के तहत होने वाले सामान्य लेन-देन 'विदाउट रिकोर्स' (Without Recourse) होते हैं। इसका अर्थ यह है कि यदि भविष्य में बायर (खरीददार) भुगतान करने में डिफॉल्ट करता है, तो फाइनेंसर उस पैसे की वसूली MSME सप्लायर से नहीं कर सकता।

TReDS प्लेटफॉर्म के प्रमुख फायदे

  • वर्किंग कैपिटल की निर्बाध उपलब्धता: इनवॉइस की मैच्योरिटी डेट का इंतजार किए बिना तुरंत पैसा मिलने से व्यवसाय का कैश-फ्लो सुचारू बना रहता है।
  • बिना कोलेटरल सहायता (Collateral-Free): SIDBI के अनुसार, MSME को बिना किसी अतिरिक्त संपत्ति या गारंटी को गिरवी रखे सिर्फ इनवॉइस के आधार पर फंड मिल जाता है।
  • देरी से भुगतान की समस्या से मुक्ति: खरीदारों से लंबे इंतजार के बाद मिलने वाले पेमेंट के चक्र से राहत मिलती है।
  • बैंक लोन पर निर्भरता में कमी: कार्यशील पूंजी के लिए अलग से महंगे वर्किंग कैपिटल लोन या वर्किंग-कैपिटल ओवरड्राफ्ट लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज

MSME उद्यमियों को RBI द्वारा अधिकृत TReDS प्लेटफॉर्म्स पर अपना रजिस्ट्रेशन (Onboarding) कराना होता है। भारत में RXIL, M1xchange और Invoicemart प्रमुख अधिकृत TReDS प्लेटफॉर्म्स हैं।

आवश्यक दस्तावेज (Documents Required):

  • बिजनेस और KYC डिटेल्स
  • पैन कार्ड (PAN Card)
  • जीएसटी नंबर (GSTIN)
  • पंजीकृत व्यावसायिक पता (Registered Address Proof)
  • बैंक स्टेटमेंट्स (Bank Statements)

रजिस्ट्रेशन से पहले इन बातों का रखें ध्यान:

  • प्लेटफॉर्म की शर्तें: अलग-अलग TReDS प्लेटफॉर्म्स के ऑनबोर्डिंग शुल्क, दस्तावेज और नियम अलग हो सकते हैं।
  • बायर्स व फाइनेंसर की उपलब्धता: MSME को रजिस्ट्रेशन से पहले यह जांच लेना चाहिए कि उनके प्रमुख खरीददार (Buyers) किस TReDS प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड हैं और वहां कितने फाइनेंसर सक्रिय हैं।