मुंबई/नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'माझी लाडकी बहीण योजना' को लेकर इन दिनों कयासों का बाजार गर्म है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार लाभार्थियों को दी जाने वाली मासिक आर्थिक सहायता में कटौती करने पर विचार कर रही है। हालांकि, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।
वेरिफिकेशन प्रक्रिया: 2.43 करोड़ से घटकर 1.8 करोड़ हुए लाभार्थी
राज्य सरकार द्वारा हाल ही में की गई सघन जांच और वेरिफिकेशन के बाद लाभार्थियों की सूची में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
सख्ती का कारण: आधार e-KYC, इनकम टैक्स विभाग के डेटा के साथ मिलान और सरकारी डेटाबेस से क्रॉस-चेक के कारण अपात्र लोगों के नाम हटाए गए हैं।
संख्या में गिरावट: इस प्रक्रिया के बाद लाभार्थियों की संख्या 2.43 करोड़ से घटकर 1.8 करोड़ रह गई है, यानी सीधे तौर पर 60 लाख लोग योजना की परिधि से बाहर हो गए हैं।
क्या घटेगी 2100 रुपये की राशि?
योजना के बजट और मासिक किस्त को लेकर दो तरह की चर्चाएं चल रही हैं:
किस्त में कमी: कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि मासिक सहायता राशि 2100 रुपये से घटाकर 1500 रुपये की जा सकती है।
बजट में बचत: दूसरी ओर, विशेषज्ञों का मानना है कि लाभार्थियों की संख्या कम होने से सरकार का काफी पैसा बचेगा। ऐसे में संभव है कि सरकार कुल बजट आवंटन कम कर दे, लेकिन व्यक्तिगत किस्त (2100 रुपये) को बरकरार रखे।
प्रमुख आंकड़े एक नजर में
| विवरण | पहले (अनुमानित) | अब (वेरिफिकेशन के बाद) |
|---|---|---|
| कुल लाभार्थी | 2.43 करोड़ | 1.8 करोड़ |
| हटाए गए नाम | - | लगभग 60 लाख |
| संभावित मासिक किस्त | ₹2100 | ₹1500 (अपुष्ट) |
लाभार्थियों के लिए सलाह
चूँकि वर्तमान में किस्त कम होने की खबरें केवल सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं, इसलिए लाभार्थियों को किसी भी प्रकार के भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए।
विशेष नोट: जब तक महाराष्ट्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक शासनादेश (GR) या स्पष्टीकरण जारी नहीं होता, तब तक पुरानी व्यवस्था ही प्रभावी मानी जाएगी। महिलाओं को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करने की सलाह दी जाती है।





