चंडीगढ़: चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के बड़े पैमाने पर खाली पड़े पदों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने चंडीगढ़ प्रशासन की खिंचाई करते हुए स्पष्ट कर दिया कि बच्चों की शिक्षा व्यवस्था के साथ कोई समझौता या इच्छाशक्ति की कमी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश जारी करते हुए प्रशासन को 31 जुलाई 2026 तक हर हाल में 582 पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी करने और सभी रिक्तियों को भरने की एक विस्तृत, चरणबद्ध कार्ययोजना पेश करने का हुक्म दिया है।

4,798 पदों में से 1,010 खाली, कोर्ट ने पूछा— 'सालों से क्यों सो रहा था प्रशासन?'

सुनवाई के दौरान जब आंकड़ों की समीक्षा की गई, तो अदालत ने पाया कि चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में कुल 4,798 स्वीकृत पदों में से लगभग 1,010 पद खाली हैं। यानी कुल क्षमता के करीब 20 प्रतिशत पद वर्षों से खाली पड़े हैं।

इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट की बेंच ने प्रशासन से तीखा सवाल पूछा कि जब छात्र-शिक्षक अनुपात (Pupil-Teacher Ratio) और शिक्षा का स्तर सीधे तौर पर इससे प्रभावित होता है, तो इन रिक्तियों को समय पर क्यों नहीं भरा गया?

प्रशासन का तर्क: आरटीई मानकों के भीतर है व्यवस्था

यूटी (UT) प्रशासन की ओर से अदालत में दलील दी गई कि तकनीकी रूप से नियमों का उल्लंघन नहीं हो रहा है:

छात्र-शिक्षक अनुपात: प्रशासन के मुताबिक, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत चंडीगढ़ में फिलहाल औसतन अनुपात 27:1 है। यह प्राथमिक स्तर (30:1) और उच्च प्राथमिक स्तर (35:1) के निर्धारित मानक के भीतर ही है।

भर्ती का आश्वासन: हालांकि, प्रशासन ने माना कि शिक्षकों की कमी एक वास्तविक समस्या है। कोर्ट को बताया गया कि पिछले वर्ष 780 शिक्षकों की भर्ती की गई थी और अब 582 नए पदों पर भर्ती के लिए प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा जा चुका है।

कोर्ट की दोटूक: अदालत ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर तो लिया, लेकिन साथ ही सचेत किया कि "केवल वादे पर्याप्त नहीं होंगे, हमें ठोस समयसीमा और जमीनी कार्रवाई चाहिए।"

प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने खोली पोल

इस मामले में निजी स्कूल एसोसिएशन की ओर से भी हस्तक्षेप (Intervention) याचिका दायर की गई। एसोसिएशन ने यूटी प्रशासन के दावों को चुनौती देते हुए कहा कि केवल स्कूल प्रबंधन समितियों (SMC) की बैठकें कागजों पर दिखाना काफी नहीं है।

एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि आरटीई की धारा 8 और 34 के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और राज्य सलाहकार परिषद की नियमित बैठकें होना अनिवार्य है। साल 2014 में कोर्ट ने हर दो महीने में बैठक करने का आदेश दिया था, इसके बावजूद राज्य सलाहकार परिषद की बैठकें नियमित रूप से नहीं की गईं।

शिक्षा सचिव से तलब किया स्कूलवार 'एक्स-रे डेटा'

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के शिक्षा सचिव को एक विस्तृत हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्रशासन से प्रत्येक स्कूल का पूरा डेटा मांगते हुए निम्नलिखित जानकारियां जमा करने को कहा है:

हर स्कूल में शिक्षकों की मौजूदा संख्या और खाली पड़े पद।

स्कूलवार छात्रों की कुल संख्या और उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं।

स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) की बैठकों का वास्तविक रिकॉर्ड।

अगली राह: हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगली सुनवाई में प्रशासन को रिक्त पदों को भरने की अंतिम तारीख (Deadline) बतानी होगी, ताकि चंडीगढ़ के बच्चों को एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य मिल सके।