भोपाल:
मध्य प्रदेश के करीब साढ़े चार लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक राहत भरी खबर है। पिछले एक दशक (10 वर्ष) से अटके प्रमोशन के रास्ते को साफ करने के लिए राज्य सरकार ने निर्णायक कदम बढ़ा दिए हैं। मुख्य सचिव के कड़े निर्देशों के बाद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गया है। विभाग ने आगामी 29 जून को राज्य के 20 प्रमुख विभागों के आला अधिकारियों की एक हाई-लेवल बैठक बुलाई है, जिसमें 'पदोन्नति नियम-2025' के तहत क्रेडर डिटेल्स और रिक्त पदों की गहन समीक्षा की जाएगी।
साल 2016 से लंबित था विवाद
मध्य प्रदेश में साल 2016 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित आरक्षण विवाद के कारण प्रमोशन की पूरी प्रक्रिया ठप पड़ी थी। इस गतिरोध को तोड़ने के लिए सरकार ने 17 जून 2025 को 'मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025' को मंजूरी दी थी। हालांकि, सरकार के इस नए नियम को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिससे एक बार फिर असमंजस की स्थिति बन गई थी।
हाल ही में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने देश के शीर्ष कानूनी विशेषज्ञों से इस विषय पर राय शुमारी की। कानूनी विशेषज्ञों ने सरकार को हरी झंडी देते हुए स्पष्ट किया है कि चूंकि हाईकोर्ट ने नए नियमों पर कोई सीधा 'स्टे' (स्थगन आदेश) नहीं लगाया है, इसलिए सरकार इस प्रक्रिया को प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
20 विभागों को कड़े निर्देश और भावी असर
सामान्य प्रशासन विभाग ने बैठक के मद्देनजर सभी 20 विभागों को सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं:
डेटा प्रस्तुतीकरण: सभी विभागों को 29 जून की बैठक में अपने क्रेडर, स्वीकृत पदों, खाली पदों और प्रमोशन के लिए जरूरी योग्यताओं का पूरा ब्योरा अनिवार्य रूप से लाना होगा।
प्रशासनिक सुधार: इस फैसले से न केवल एक दशक से अपनी बारी का इंतजार कर रहे लाखों कर्मचारियों को वित्तीय और पद जन्य लाभ मिलेगा, बल्कि प्रशासनिक ढांचा भी मजबूत होगा।
नए रोजगार के अवसर: वरिष्ठ पदों पर प्रमोशन होने से निचले स्तर पर क्रेडर खाली होंगे, जिससे राज्य के युवाओं के लिए नई भर्तियों और सीधे रोजगार के रास्ते खुलेंगे।
कर्मचारी संगठनों ने जताई आपत्ति
जहाँ एक तरफ इस फैसले से सचिवालय से लेकर जिला स्तर के कर्मचारियों में खुशी की लहर है, वहीं दूसरी ओर कुछ कर्मचारी संगठनों ने इस प्रक्रिया पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। संगठनों का आरोप है कि सरकार ने पूर्व में अदालत को जो आश्वासन दिए थे, वर्तमान कदम उसके विपरीत हैं।
बहरहाल, कानूनी अड़चनों के बीच सरकार के इस आक्रामक और सकारात्मक रुख से यह साफ है कि वह कर्मचारियों की इस पुरानी मांग को अब और ठंडे बस्ते में डालने के मूड में नहीं है। 29 जून को होने वाली यह महाबैठक मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।





