पटना/गया: बिहार की माटी में आज होली का हुड़दंग और आपसी प्रेम का रंग कुछ ज्यादा ही गहरा नजर आ रहा है। 'बुरा न मानो होली है' के जयघोष के साथ आम जनमानस से लेकर सत्ता के गलियारों तक, हर कोई रंगों में सराबोर है। सूबे के कोने-कोने से उमंग, उत्साह और पारंपरिक लोकगीतों की गूंज सुनाई दे रही है।
गांधी मैदान में मंत्री का 'देसी' अंदाज: जमकर थिरके रामकृपाल यादव
राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आज एक अलग ही नजारा देखने को मिला। बिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने स्थानीय लोगों और 'मॉर्निंग वॉकर्स संघ' के साथ होली मनाई।
परंपरा का निर्वाह: मंत्री ने बताया कि वह पिछले 40 वर्षों से इसी स्थान पर होली मनाते आ रहे हैं।
गीत और नृत्य: इस अवसर पर रामकृपाल यादव न केवल बैंड-बाजे की थाप पर थिरके, बल्कि उन्होंने पारंपरिक होली गीत गाकर समां बांध दिया।
किसानों को संदेश: रंगों से सराबोर मंत्री ने विशेष रूप से प्रदेश के अन्नदाताओं को बधाई देते हुए कहा, "हमारे किसान खुशहाल रहें और खेतों में खूब उत्पादन हो, यही मेरी कामना है।"
गया में 'पिचकारी' की जंग और गीतों की मस्ती
मोक्ष की धरती गया में भी बुधवार सुबह से ही उल्लास का सैलाब उमड़ पड़ा। शहर की गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक, हर जगह अबीर और गुलाल के बादल उड़ते दिखे।
बच्चों की मस्ती: सुबह होते ही नन्हे-मुन्ने टोलियां बनाकर हाथों में पिचकारी लिए सड़कों पर उतर आए और आने-जाने वालों को सतरंगी रंगों से भिगो दिया।
साउंड सिस्टम की धुन: युवाओं की टोलियों ने जगह-जगह साउंड सिस्टम लगाकर फिल्मी और पारंपरिक भोजपुरी होली गीतों पर जमकर डांस किया।
डिजिटल होली: जमीन के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी 'हैप्पी होली' और शुभकामनाओं की बाढ़ आई हुई है।
बिहार की होली 2026: मुख्य आकर्षण
| क्षेत्र | गतिविधि | विशेष विवरण |
|---|---|---|
| पटना | वीआईपी होली | कृषि मंत्री का समर्थकों के साथ सार्वजनिक उत्सव। |
| गया | जन-उत्सव | सड़कों पर डीजे की धुन और युवाओं का हुड़दंग। |
| बाजार | व्यापार | गुलाल, पिचकारी और पकवानों की दुकानों पर भारी भीड़। |
| परंपरा | लोक संगीत | ढोलक और झाल की थाप पर 'फगुआ' गायन। |
सुरक्षा और शांति: पूरे प्रदेश में शांतिपूर्ण तरीके से त्योहार संपन्न कराने के लिए प्रशासन मुस्तैद है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस की विशेष गश्त जारी है ताकि त्योहार की खुशी में कोई खलल न पड़े।
निष्कर्ष: बिहार की यह होली न केवल रंगों का पर्व है, बल्कि यह सामाजिक समरसता का भी प्रतीक बन गई है, जहाँ ऊंच-नीच का भेद मिटाकर हर कोई एक ही रंग—'मोहब्बत के रंग'—में रंगा नजर आ रहा है।





