प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से वार्ता के दौरान विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा। शंकराचार्य के मुद्दे से लेकर बीएलओ की आत्महत्या तक, डिप्टी सीएम ने हर मोर्चे पर सरकार का पक्ष मजबूती से रखा और विपक्ष के आरोपों को 'राजनीतिक पैंतरा' करार दिया।
"हिंदू धर्म में शंकराचार्य का स्थान सर्वोच्च"
शंकराचार्य के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य साक्षात भगवान के रूप हैं। उन्होंने स्पष्ट किया:
भव्य स्वागत: "शंकराचार्य जहाँ भी जाएंगे, एक रामभक्त होने के नाते हम उनका हृदय से स्वागत करेंगे।"
विपक्ष पर प्रहार: मौर्य ने अखिलेश यादव को 'ढोंगी' बताते हुए कहा कि सपा शासन में रामभक्तों और शिवभक्तों का दमन किया गया था। अब शंकराचार्य को समर्थन देना केवल हिंदू मतदाताओं को भ्रमित करने की एक चाल है।
गोसेवा और सुशासन पर हुंकार
डिप्टी सीएम ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और गोवंश की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि यूपी में अब अपराधियों और गो-तस्करों के हौसले पस्त हैं।
"गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। उन्हें किसी सरकारी दर्जे की आवश्यकता नहीं, वे स्वतः पूजनीय हैं। प्रदेश में किसी भी गो-तस्कर की हिम्मत नहीं कि वह गोमाता की ओर आंख उठाकर देखे।"
उन्होंने आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकास की लहर के दम पर 2047 तक भाजपा सरकार बनी रहेगी और विपक्ष का गठबंधन ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगा।
अखिलेश यादव का पलटवार: बीएलओ की आत्महत्या पर सरकार को घेरा
दूसरी ओर, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 'एसआईआर-2026' (Special Interaction Program) के दबाव और प्रशासन की संवेदनहीनता को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्रमुख बिंदु:
बीएलओ की आत्महत्या: फतेहपुर के ग्राम अलियाबाद में शिक्षामित्र और बीएलओ अखिलेश कुमार सविता द्वारा फांसी लगाकर जान देने की घटना को अखिलेश ने 'सरकारी हत्या' करार दिया।
दबाव की राजनीति: उन्होंने आरोप लगाया कि बीएलओ पर फॉर्म-6 के जरिए फर्जी नाम जोड़ने और फॉर्म-7 के जरिए सही नाम काटने का भारी दबाव है।
भावनात्मक अपील: अखिलेश ने कहा कि मृतक बीएलओ की 10 दिन बाद बेटी की शादी थी, लेकिन अधिकारियों ने छुट्टी नहीं दी। उन्होंने भाजपा को 'हृदयहीन' बताते हुए कहा कि इस पाप का फल उन्हें भुगतना होगा।
अखिलेश की अपील: "निराश-हताश न हों, आपका जीवन परिवार के लिए अनमोल है। इतिहास गवाह है कि ऐसी निर्मम सत्ताओं का पतन निश्चित होता है।"
निष्कर्ष: दावों और आरोपों की जंग
जहाँ केशव मौर्य हिंदुत्व और विकास के एजेंडे पर अडिग हैं, वहीं अखिलेश यादव प्रशासनिक कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के मानसिक उत्पीड़न को मुद्दा बना रहे हैं। आगामी चुनाव से पहले 'शंकराचार्य' और 'जनता के मुद्दों' पर यह जुबानी जंग प्रदेश की राजनीति को और गरमा रही है।





