अमृतसर/चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब राज्य के कद्दावर नेता और पूर्व परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर के खिलाफ एक सरकारी अधिकारी को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया। शनिवार को पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के जिला प्रबंधक गगनदीप सिंह रंधावा द्वारा जहरीला पदार्थ खाकर जीवन लीला समाप्त करने के बाद पुलिस ने यह कड़ी कार्रवाई की है।

FIR में पिता और पीए का भी नाम शामिल

अमृतसर के रणजीत एवेन्यू पुलिस स्टेशन में रंधावा की पत्नी उपिंदर कौर की शिकायत पर देर रात मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने लालजीत भुल्लर के साथ-साथ उनके पिता सुखदेव सिंह भुल्लर और निजी सहायक (PA) दिलबाग सिंह को भी नामजद किया है।

इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है:

धारा 108: आत्महत्या के लिए उकसाना।

धारा 351 (3): आपराधिक धमकी देना।

धारा 3 (5): साझा इरादा (मिलीभगत)।

इस्तीफे के बाद बढ़ीं मुश्किलें

यह कानूनी कार्रवाई उस वक्त हुई जब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने निष्पक्ष जांच का हवाला देते हुए लालजीत भुल्लर से इस्तीफा मांग लिया था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भुल्लर के पास रहे परिवहन और जेल विभाग अब किसी अन्य मंत्री को सौंपे जाएंगे।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो बना 'डेथ नोट'

खुदकुशी से ठीक पहले रंधावा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। वीडियो में रंधावा को कथित तौर पर यह कहते सुना जा सकता है:

"तुम्हारे दोस्त ने सल्फास खा ली है... मंत्री लालजीत भुल्लर के डर से। अब मैं नहीं बचूंगा।"

गंभीर आरोप: मारपीट और मानसिक उत्पीड़न

विपक्षी दलों और रंधावा के परिवार ने भुल्लर पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं:

टेंडर का दबाव: आरोप है कि भुल्लर अपने पिता को एक गोदाम का टेंडर दिलवाने के लिए रंधावा पर लगातार दबाव बना रहे थे।

मारपीट और अपमान: शिकायत के अनुसार, 13 मार्च को रंधावा को मंत्री के घर बुलाया गया, जहाँ उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें बुरी तरह अपमानित किया गया।

जबरन कबूलनामा: यह भी आरोप है कि मंत्री ने रंधावा का एक वीडियो बनाया और उन्हें जबरन यह कहने पर मजबूर किया कि उन्होंने किसी अन्य पार्टी से 10 लाख रुपये की रिश्वत ली है।

भुल्लर का पक्ष

दूसरी ओर, पट्टी से विधायक लालजीत सिंह भुल्लर ने इन सभी आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है।

निष्कर्ष: पंजाब सरकार के लिए यह मामला एक बड़ी अग्निपरीक्षा बन गया है। एक तरफ भ्रष्टाचार विरोधी छवि बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ अपने ही पूर्व मंत्री पर लगे संगीन आरोप। अब देखना यह होगा कि पुलिस की जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं।