बठिंडा: पंजाब के बठिंडा में कांग्रेस नेता के बेटे दविंदर पाल सिंह द्वारा की गई आत्महत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मुख्य आरोपी बिल्डर बिंदरपाल मित्तल और उनके दो बेटों, प्रतीक व भरत मित्तल के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि आरोपी देश छोड़कर विदेश न भाग सकें।
मौत से पहले बनाया 8 मिनट का 'डेथ वीडियो'
इस हाई-प्रोफाइल मामले में मृतक दविंदर पाल सिंह का सुसाइड नोट और मरने से पहले बनाया गया 8 मिनट 45 सेकंड का वीडियो सबसे अहम सबूत बनकर उभरा है। वीडियो में दविंदर ने भावुक होकर अपनी आपबीती सुनाई है:
उसने अपने पिता की जमीन बेचकर मिले पैसे, बीमा राशि और जीवन भर की जमा पूंजी इन बिल्डरों को दे दी थी।
खुद के 5.5 करोड़ रुपये के अलावा, उसने अपने दोस्तों और परिचितों के भी करीब 6-7 करोड़ रुपये उक्त फर्म में निवेश करवाए थे।
वीडियो में उसने स्पष्ट तौर पर कहा कि मित्तल परिवार ने उसके साथ "सबसे बड़ा धोखा" किया और पैसे लौटाने से साफ मुकर गए।
आर्थिक दबाव और मानसिक प्रताड़ना
थाना कैनाल कॉलोनी पुलिस ने मृतक की मां परमिंदर कौर के बयानों के आधार पर मामला दर्ज किया है। परिवार का आरोप है कि दविंदर ने आरोपियों को मोटी रकम ब्याज पर दी थी, लेकिन जब उसने अपनी राशि वापस मांगी, तो आरोपियों ने उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इसी भारी तनाव के चलते दविंदर ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से खुद को गोली मार ली।
"आरोपी घटना के बाद से ही मोबाइल बंद कर भूमिगत हो गए हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं और संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।" — नरेंद्र सिंह, एसपी सिटी, बठिंडा
शहर में तनाव, बिल्डर लॉबी के खिलाफ गुस्सा
इस आत्मघाती कदम ने पूरे बठिंडा को झकझोर कर रख दिया है। शहर के सामाजिक संगठनों और कांग्रेस समर्थकों में भारी आक्रोश है। लोग बिल्डर लॉबी की मनमानी और वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
जांच के मुख्य बिंदु:
वित्तीय लेनदेन: पुलिस 5.5 करोड़ रुपये के लेनदेन के दस्तावेजों और बैंक खातों की गहन जांच कर रही है।
धोखाधड़ी का एंगल: फिलहाल मामला 'आत्महत्या के लिए उकसाने' (IPC 306) के तहत दर्ज है, लेकिन जांच के बाद इसमें धोखाधड़ी की धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
फरारी: आरोपियों के रिश्तेदारों और करीबियों पर नजर रखी जा रही है ताकि उनकी लोकेशन ट्रेस की जा सके।
निष्कर्ष: पुलिस का दावा है कि तकनीकी साक्ष्यों और वीडियो क्लिप के आधार पर आरोपियों का बचना नामुमकिन है। यह मामला न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि शहर में निवेश के नाम पर चल रहे संभावित बड़े वित्तीय घोटाले की ओर भी इशारा कर रहा है।





