चंडीगढ़/जैतो: पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) की दसवीं कक्षा के परीक्षा परिणामों ने राज्य के शैक्षणिक परिदृश्य में उत्साह भर दिया है। इस बार के परिणामों में जैतो की हरलीन शर्मा ने पूरे राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जबकि रूपनगर के मणिमहेश शर्मा ने दूसरा और होशियारपुर की रिया रानी ने तीसरा स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
1. हरलीन शर्मा (रैंक 1): 'जज' बनने का सपना और सुबह 4 बजे की तपस्या
जैतो के 'सरस्वती सीनियर सेकेंडरी स्कूल' की छात्रा हरलीन शर्मा ने 650 में से 646 अंक (99.38%) प्राप्त कर प्रदेश भर में सर्वोच्च स्थान पाया है।
सफलता का सूत्र: हरलीन ने बताया कि उनके माता-पिता उन्हें रोजाना सुबह 4 बजे पढ़ाई के लिए उठाते थे। उनकी सफलता में परिवार का त्याग और कड़ी मेहनत शामिल है।
लक्ष्य: हरलीन भविष्य में जज बनकर समाज को न्याय दिलाना चाहती हैं।
2. मणिमहेश शर्मा (रैंक 2): बिना ट्यूशन सरकारी स्कूल के छात्र ने किया कमाल
रूपनगर के गांव चनौली बस्सी के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र मणिमहेश शर्मा ने 650 में से 645 अंक (99.23%) लेकर राज्य में दूसरा स्थान पाया है।
बिना कोचिंग की जीत: मणिमहेश की उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बिना किसी महंगी कोचिंग या ट्यूशन के यह मुकाम हासिल किया।
लक्ष्य: वह एक अधिकारी बनकर देश की सेवा करने का जज्बा रखते हैं।
3. रिया रानी (रैंक 3): स्मार्ट स्टडी और एकाग्रता से पाई मंजिल
होशियारपुर के 'श्री गुरु हरकृष्ण पब्लिक स्कूल' की छात्रा रिया रानी ने 650 में से 645 अंक हासिल कर मेरिट में तीसरा स्थान प्राप्त किया है।
पढ़ाई का तरीका: रिया दिन में केवल 1 से 3 घंटे पढ़ती थीं, लेकिन विषय की गहराई (Clarity) पर उनका पूरा ध्यान रहता था।
कला में रुचि: पढ़ाई के साथ-साथ रिया को चित्रकला (Drawing) और खेलों में भी काफी दिलचस्पी है। वह आगे चलकर विज्ञान क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं।
पंजाब के 'टॉप-3' मेधावी: एक नजर में
| स्थान | नाम | स्कूल | अंक / प्रतिशत | लक्ष्य |
|---|---|---|---|---|
| प्रथम (1st) | हरलीन शर्मा | सरस्वती स्कूल, जैतो | 646 (99.38%) | जज बनना |
| द्वितीय (2nd) | मणिमहेश शर्मा | सरकारी स्कूल, चनौली बस्सी | 645 (99.23%) | देश सेवा (अधिकारी) |
| तृतीय (3rd) | रिया रानी | गुरु हरकृष्ण स्कूल, होशियारपुर | 645 (99.23%) | विज्ञान में करियर |
जश्न और प्रेरणा का माहौल
परिणाम घोषित होते ही संबंधित स्कूलों और गांवों में उत्सव जैसा माहौल देखा गया। कहीं ढोल की थाप पर भंगड़े डाले गए, तो कहीं मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया गया। स्कूल प्रबंधन और अध्यापकों का मानना है कि इन विद्यार्थियों ने यह साबित कर दिया है कि अनुशासन, निरंतरता और आत्मविश्वास के बल पर सरकारी या निजी, किसी भी संस्थान से दुनिया जीती जा सकती है।
इन तीनों होनहारों की सफलता अब पंजाब के लाखों अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का नया स्रोत बन गई है।





