भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रिहायशी इलाकों (रेजिडेंशियल एरिया) में चल रहे व्यावसायिक (कॉमर्शियल) प्रतिष्ठानों के खिलाफ नगर निगम की सख्त कार्रवाई पर फिलहाल राज्य सरकार ने रोक लगा दी है। लगातार बढ़ते विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल के जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के पालन हेतु एक विशेष नीति बनाने के लिए हाई-स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा, और तब तक नगर निगम कोई कठोर कार्रवाई नहीं करेगा।

बैठक में कौन-कौन हुए शामिल?

मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस अहम बैठक में शासन-प्रशासन के प्रमुख चेहरे शामिल हुए:

जनप्रतिनिधि: कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग, मंत्री कृष्णा गौर, विधायक रामेश्वर शर्मा और विधायक भगवान दास सबनानी।

वरिष्ठ अधिकारी: मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, आयुक्त नगरीय प्रशासन संकेत भोंडवे, आयुक्त नगर एवं ग्राम निवेश कौशलेन्द्र सिंह, भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन।

क्यों बनी कमेटी और क्या होगा काम?

सुप्रीम कोर्ट के सिविल अपील आदेश के तहत भोपाल शहर में निर्मित भवनों में अधिभोग उल्लंघन (Occupancy Violation) के खिलाफ अभियान चलाकर कई बड़े रेस्टोरेंट और प्रतिष्ठान सील कर दिए गए थे।

नीतिगत निर्णय के लिए समिति: सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए एक व्यवस्थित प्रक्रिया और नीति बनाने के लिए समिति के गठन का फैसला किया है।

समिति की संरचना:

अध्यक्ष: अपर मुख्य सचिव (नगरीय विकास एवं आवास विभाग)।

सदस्य: एमएसएमई, श्रम, पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, पंजीयन व टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के प्रमुख अधिकारी।

विशेष आमंत्रित: भोपाल कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त।

व्यापारियों को फिलहाल राहत

यह समिति न्यायालय के आदेशों का अध्ययन कर सभी व्यावहारिक पहलुओं पर विचार करेगी और अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। शासन द्वारा इस रिपोर्ट के आधार पर दिशा-निर्देश निर्धारित किए जाएंगे, जिसके बाद ही नगर निगम आगे की कार्रवाई करेगा। तब तक भोपाल में किसी भी कॉमर्शियल प्रतिष्ठान पर सख्त सीलिंग या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।