फतेहाबाद | हरियाणा के फतेहाबाद जिले के कुम्हारिया गांव में उस वक्त मातम छा गया, जब रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे से 23 वर्षीय अंकित जांगड़ा की मौत की खबर घर पहुंची। शनिवार को अंकित का पार्थिव शरीर विशेष विमान से दिल्ली पहुंचा, जिसे लेने के लिए परिजन दिल्ली रवाना हो चुके हैं। देर शाम तक गांव में ही उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
स्टडी वीजा और 'नौकरी' का खूनी जाल
अंकित की कहानी विदेश जाकर बेहतर भविष्य बनाने के उन हजारों युवाओं जैसी है, जो धोखे का शिकार हो रहे हैं।
फरवरी 2025: अंकित स्टडी वीजा पर रूस गया और मास्को के एक संस्थान में भाषा कोर्स में दाखिला लिया।
साजिश: खर्च निकालने के लिए वह एक रेस्टोरेंट में काम करने लगा, जहाँ वह एक महिला एजेंट के संपर्क में आया।
धोखा: परिजनों का आरोप है कि उस एजेंट ने बेहतर नौकरी का लालच देकर अंकित और उसके साथी विजय पूनिया सहित 15 युवकों को रूसी सेना में भर्ती करवा दिया।
मदद की गुहार रही बेअसर, एक साथी अब भी लापता
अंकित के बड़े भाई रघुवीर और अन्य परिजनों ने उसे वापस लाने के लिए दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक के चक्कर काटे। रूसी दूतावास, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय से बार-बार गुहार लगाई गई।
"सिरसा सांसद कुमारी सैलजा और रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी इस मामले में विदेश मंत्री को पत्र लिखे थे, लेकिन दुर्भाग्यवश अंकित की सुरक्षित वापसी नहीं हो सकी।"
चिंता की बात यह है कि इसी गांव का दूसरा युवक विजय पूनिया अब भी लापता है। पिछले तीन महीनों से उसका परिवार से कोई संपर्क नहीं हुआ है। एजेंट ने पहले उनके मारे जाने की बात कही और फिर अपना फोन बंद कर लिया, जिससे विजय के परिवार में भी किसी अनहोनी का डर बना हुआ है।
सालों तक रहेगा अपनों को मलाल
अंकित के शव की सूचना मिलते ही पूरे कुम्हारिया गांव में चूल्हे नहीं जले। ग्रामीण इस बात से आक्रोशित हैं कि पढ़ाई के बहाने गए युवाओं को धोखे से युद्ध के मैदान में झोंका जा रहा है। अब सबकी निगाहें सरकार पर टिकी हैं कि लापता विजय पूनिया का पता लगाया जाए और इन युवकों को मौत के मुंह में धकेलने वाले एजेंटों पर सख्त कार्रवाई की जाए।





