नासिक/मुंबई: महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की बीपीओ यूनिट से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कॉर्पोरेट नैतिकता और कार्यस्थल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले 40 दिनों से चल रही पुलिस की गुप्त जांच के बाद, यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण और महिलाओं के शोषण के आरोप में अब तक 9 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस ने एचआर मैनेजर और टीम लीडर्स सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया है।

व्यवस्था की रक्षक ही बनी भक्षक: निदा खान का नाम प्रमुखता से आया

इस पूरे प्रकरण में नासिक यूनिट की तत्कालीन मानव संसाधन (HR) मैनेजर निदा खान को मुख्य साजिशकर्ता बताया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि निदा खान कंपनी की आंतरिक शिकायत निवारण समिति (ICC) की सदस्य थीं, जिनकी जिम्मेदारी कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और POSH (यौन उत्पीड़न निवारण) अधिनियम का पालन सुनिश्चित करना था।

जांच में सामने आया है कि निदा खान ने पीड़ितों द्वारा भेजी गई 78 से अधिक ईमेल और चैट शिकायतों को न केवल नजरअंदाज किया, बल्कि उन्हें उच्च अधिकारियों तक पहुंचने से भी रोका। कुछ पीड़ितों के अनुसार, निदा ने शिकायतों को यह कहकर खारिज कर दिया कि "कॉर्पोरेट कल्चर में ऐसी बातें आम हैं।"

शोषण का भयावह पैटर्न: लालच, ब्लैकमेल और धर्मांतरण

पीड़ित महिलाएं, जिनकी उम्र मुख्य रूप से 18 से 25 वर्ष के बीच है, ने पुलिस को आपबीती सुनाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं:

यौन उत्पीड़न: टीम लीडर्स (आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तर, दानिश शेख, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी और शफी शेख) पर आरोप है कि उन्होंने बेहतर सैलरी और प्रमोशन का लालच देकर युवतियों को फंसाया। इसके बाद शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव और ब्लैकमेलिंग की गई। कुछ मामलों में बलात्कार के आरोप भी शामिल हैं।

धर्मांतरण का दबाव: पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि उन्हें कार्यस्थल पर नमाज पढ़ने, रोजा रखने और मांसाहार करने के लिए मजबूर किया गया। कइयों पर धर्म परिवर्तन के लिए भी मानसिक दबाव बनाया गया।

पुलिस की बड़ी कार्रवाई और गिरफ्तारियां

नासिक पुलिस की सघन जांच के बाद इस 'सिंडिकेट' का भंडाफोड़ हुआ है। अब तक छह टीम लीडर्स और एचआर विभाग के अधिकारियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। पुलिस का मानना है कि निदा खान ने आरोपी पुरुष कर्मचारियों को संरक्षण देने और शिकायतों को दबाने में 'मास्टरमाइंड' की भूमिका निभाई।

कॉर्पोरेट जगत में हड़कंप

यह मामला सामने आने के बाद देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि रिपोर्टों के अनुसार, निदा खान ने जनवरी 2026 में कंपनी छोड़ दी थी, लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान हुए इस संगठित अपराध ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ा दी हैं।

जांच का दायरा: पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह केवल एक यूनिट का मामला है या इसके तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं। फिलहाल, नासिक की इस घटना ने पूरे महाराष्ट्र में आक्रोश पैदा कर दिया है।