लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गुरुवार को आध्यात्मिक और राजनीतिक हलचलों का अनूठा संगम देखने को मिला। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हासेमऊ स्थित गोशाला में गो-पूजन के साथ 'गो प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान' का आगाज़ किया। इस दौरान समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उनसे मुलाकात कर आशीर्वाद लिया, जिससे प्रदेश का सियासी पारा गरमा गया है।
गोरक्षा के लिए 'चतुरंगिणी सेना' का गठन
शंकराचार्य ने गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने और उनकी रक्षा के लिए धर्मयुद्ध का आह्वान किया। उन्होंने 'चतुरंगिणी सेना' बनाने की घोषणा की, जिसका अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि इसमें चार बल शामिल होंगे:
बुद्धि बल
बाहुबल
धन बल
समर्पित सहयोगियों का बल
स्वामी जी ने अनुयायियों को ऋग्वेद के मंत्रों का जाप कराया और भगवान कृष्ण की 'चक्र मुद्रा' का अभ्यास कराते हुए कहा कि कसाईखाना चलाने वाले और गायों को कष्ट देने वाले लोग आधुनिक युग के 'वृत्रासुर' हैं।
सियासी चतुरता पर कटाक्ष: "मैं इस्तेमाल होने वाली वस्तु नहीं"
अमर उजाला से खास बातचीत में शंकराचार्य ने अपनी राजनीतिक तटस्थता को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा:
"सपा, कांग्रेस या कोई भी दल इतना चतुर नहीं है कि मेरा इस्तेमाल कर सके। मैं किसी दल के लिए नहीं, बल्कि गंगा और गाय के लिए काम कर रहा हूँ। ये मुद्दे भाजपा के भी रहे हैं, अगर वह चाहे तो वह भी मेरे समर्थन में आ सकती है।"
अखिलेश यादव की मुलाकात: "नकली संतों का होगा अंत"
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कृष्णा नगर में शंकराचार्य से करीब एक घंटे तक जमीन पर बैठकर चर्चा की। मुलाकात के बाद अखिलेश ने भाजपा और 'नकली संतों' पर तीखा हमला बोला:
नकली संतों पर प्रहार: अखिलेश ने कहा कि शंकराचार्य के आशीर्वाद से अब वे लोग बेनकाब होंगे जो धर्म के नाम पर जनता को गुमराह करते हैं।
गैस संकट पर घेरा: उन्होंने रसोई गैस की किल्लत के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि गलत नीतियों के कारण लोग फिर से लकड़ी पर खाना बनाने को मजबूर हैं।
भाजपा की बैठकों पर तंज: अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा जिलों में बैठकें कर लोकतंत्र को खत्म कर रही है और विधायकों के टिकट काटने की रणनीति में सरकारी अधिकारियों को शामिल कर रही है।
जेपीएनआईसी की उपेक्षा पर उठाए सवाल
मुलाकात के दौरान सपा नेता पूजा शुक्ला ने गोमतीनगर स्थित जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) की बदहाली का मुद्दा उठाया। इस पर शंकराचार्य ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि जो लोग जेपी आंदोलन से निकले हैं, वे ही उनके नाम के भवन की उपेक्षा कर रहे हैं।
निष्कर्ष
शंकराचार्य का यह अभियान और अखिलेश यादव के साथ उनकी निकटता आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति और धार्मिक विमर्श को एक नई दिशा दे सकती है। जहाँ एक ओर शंकराचार्य ने गोरक्षा को चुनावी एजेंडे से ऊपर बताया है, वहीं विपक्ष इसे भाजपा के खिलाफ एक नैतिक जीत के रूप में देख रहा है।





