नई दिल्ली: करीब 6 महीने (170 दिन) की हिरासत के बाद रिहा हुए लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने मंगलवार, 17 मार्च को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनकी रिहाई उनके लिए कोई मुद्दा नहीं थी; असली मुद्दा लद्दाख के अस्तित्व और वहां के भविष्य को सुरक्षित करना है।
"जेल की सलाखों के पीछे भी था न्याय पर भरोसा"
जोधपुर जेल में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत बंद रहे वांगचुक ने बताया कि उन्होंने खुद को मानसिक रूप से लंबे समय के लिए तैयार कर लिया था।
न्यायपालिका पर विश्वास: उन्होंने कहा, "जेल में रहते हुए भी मुझे पूरा भरोसा था कि अंततः कोर्ट में हमारी जीत होगी और न्याय मिलेगा।"
जेल का अनुभव: जेल के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वहां 70% लोग गरीब और अनपढ़ हैं, जिन्हें शिक्षा और व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है। उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी कहा कि सबको कम से कम एक बार जेल जाकर नेहरू जी की किताबें पढ़नी चाहिए।
लद्दाख की तीन प्रमुख मांगें
वांगचुक ने दोहराया कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक लद्दाख की बुनियादी मांगें पूरी नहीं हो जातीं:
छठी अनुसूची (Sixth Schedule): जनजातीय आबादी के संरक्षण के लिए संवैधानिक सुरक्षा।
पूर्ण राज्य का दर्जा (Statehood): लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश से बदलकर पूर्ण राज्य बनाना।
पर्यावरण संरक्षण: हिमालयी क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को औद्योगिक हस्तक्षेप से बचाना।
सरकार के साथ 'विन-विन' बातचीत का प्रस्ताव
रिहाई के बाद गृह मंत्रालय की ओर से बातचीत की पेशकश पर वांगचुक ने सकारात्मक संकेत दिए हैं।
सकारात्मक रुख: उन्होंने कहा, "हम हमेशा से बातचीत के लिए तैयार थे। सरकार का प्रस्ताव एक 'विन-विन सिचुएशन' (दोनों पक्षों की जीत) है। इससे सरकार की छवि भी अच्छी होगी और लद्दाख के मुद्दों का समाधान भी निकलेगा।"
अहिंसक विरोध: वांगचुक ने साफ किया कि अनशन करना उनकी मजबूरी है, शौक नहीं। उन्होंने गांधीवादी मूल्यों का हवाला देते हुए कहा कि जब कोई रास्ता नहीं बचता, तभी वे उपवास का सहारा लेते हैं।
आंदोलन की पृष्ठभूमि: एक नज़र में
| विवरण | आंकड़े/तथ्य |
|---|---|
| हिरासत की अवधि | 170 दिन (जोधपुर जेल) |
| NSA हटाया गया | 14 मार्च 2026 (केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा) |
| आरोप | आंदोलन के दौरान हिंसा के लिए प्रेरित करना (जिसे वांगचुक ने नकारा) |
| मुख्य मांग | छठी अनुसूची और राज्य का दर्जा |
आगे की राह: जांच और शांति की अपील
वांगचुक ने मांग की है कि लद्दाख में हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह समझा जा सके कि माहौल किसने और कैसे बिगाड़ा। उन्होंने लद्दाख में फिर से वैसा ही 'भलाई का माहौल' बनाने पर जोर दिया जो वहां के विकास के लिए जरूरी है।
निष्कर्ष: सोनम वांगचुक की रिहाई ने केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच संवाद का एक नया द्वार खोल दिया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि गृह मंत्रालय और लद्दाख की संस्थाओं के बीच होने वाली यह बैठक कब और किन शर्तों पर आगे बढ़ती है।





