चंडीगढ़: पंजाब में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की बजाय पारंपरिक बैलेट पेपर (मतपत्र) से कराने के राज्य सरकार के फैसले पर कानूनी रार बढ़ गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में मंगलवार को इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर बेहद लंबी और तीखी बहस हुई। अदालत ने राज्य चुनाव आयोग से सीधा सवाल किया कि जब वर्षों से चुनाव ईवीएम से हो रहे थे, तो अचानक पुरानी व्यवस्था पर लौटने का क्या औचित्य है?
याचिकाकर्ता के तर्क: "सुप्रीम कोर्ट भी बता चुका है इसे अव्यवहारिक"
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने सरकार के इस फैसले को वैधानिक और व्यावहारिक रूप से गलत ठहराया। उनकी मुख्य दलीलें इस प्रकार थीं:
सुप्रीम कोर्ट का हवाला: वरिष्ठ वकील ने शीर्ष अदालत के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया को दोबारा बैलेट पेपर प्रणाली पर ले जाने की मांग को सुप्रीम कोर्ट पहले ही "अस्वीकार्य और अव्यवहारिक" बता चुका है।
कानूनी वैधता: अदालतों ने वर्ष 2002 में ही ईवीएम प्रणाली को कानूनी वैधता दे दी थी। पंजाब राज्य चुनाव आयोग अधिनियम की धारा 64 के तहत जहां भी बैलेट बॉक्स या बैलेट पेपर लिखा है, वहां स्पष्टीकरण के अनुसार ईवीएम को भी उसमें शामिल माना जाता है।
EVM के फायदे: वकील ने दलील दी कि ईवीएम से अवैध वोटों (Invalid Votes) की संभावना खत्म हो जाती है, मतगणना तेजी से होती है और बूथ कैप्चरिंग जैसी धांधली की आशंकाएं न्यूनतम हो जाती हैं, जबकि बैलेट पेपर प्रणाली की कमजोरियां जगजाहिर हैं।
"केवल प्रशासनिक या लॉजिस्टिक कठिनाई का बहाना बनाकर वर्षों से सुचारू रूप से चल रही आधुनिक ईवीएम प्रणाली को अचानक समाप्त करके देश को पीछे नहीं धकेला जा सकता।"
— याचिकाकर्ता पक्ष की दलील
राज्य चुनाव आयोग की सफाई: "मशीनें उपलब्ध नहीं थीं"
अदालत के कड़े रुख के बाद राज्य चुनाव आयोग ने अपनी लाचारी व्यक्त की। आयोग के वकील ने दलील दी:
चुनावों के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से ईवीएम मांगी गई थीं।
लेकिन वे मशीनें पहले ही अन्य राज्यों में भेजी जा चुकी थीं, जिससे वे तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकीं।
आंध्र प्रदेश या अन्य दूरदराज के राज्यों से मशीनें मंगाने में भारी समय और लॉजिस्टिक (परिवहन) संबंधी दिक्कतें आ रही थीं, इसीलिए बैलेट पेपर का विकल्प चुना गया।
हाई कोर्ट का कड़ा रुख: रिकॉर्ड पेश करने के आदेश
हाई कोर्ट ने केवल मौखिक दलीलों को पर्याप्त नहीं माना। खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयोग को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के साथ मशीनों की मांग को लेकर किए गए सभी पत्राचार और उपलब्ध रिकॉर्ड को अदालत के समक्ष पेश किया जाए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट इस बात की बारीकी से जांच करेगा कि क्या वाकई मशीनों की कमी थी या यह निर्णय केवल प्रशासनिक जल्दबाजी में लिया गया।





