बेंगलुरु। कर्नाटक कांग्रेस में पिछले कई महीनों से सुलग रही मंत्रिमंडल फेरबदल और नेतृत्व परिवर्तन (Leadership Change) की चिंगारी एक बार फिर भड़क उठी है। केरलम विधानसभा चुनाव के संपन्न होने और वहां नई सरकार के गठन के ठीक बाद कर्नाटक का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से हुई हालिया मुलाकातों ने राज्य में 'सत्ता के पुनर्गठन' की अटकलों को बेहद तेज कर दिया है।
हाईकमान भले ही इस संवेदनशील मसले पर फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक सरकार के 3 साल पूरे होने के मौके पर यह अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सड़कों और बयानों में दिखने लगी है।
राहुल गांधी से मुलाकातों का दौर: क्या है सिद्धारमैया का प्लान?
केरलम दौरे के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी से अलग से (One-on-One) मुलाकात की। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि:
सिद्धारमैया ने हाईकमान से दिल्ली में मंत्रिमंडल फेरबदल (Cabinet Reshuffle) पर आधिकारिक और अंतिम चर्चा करने का समय मांगा है।
वह अपने कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव करने और नए चेहरों को शामिल कर असंतोष को थामने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
दूसरी ओर, डी.के. शिवकुमार का खेमा भी दिल्ली में लगातार सक्रिय है, जिससे साफ है कि दोनों ही गुट हाईकमान के सामने अपना-अपना पलड़ा भारी रखने की कोशिश में जुटे हैं।
तुमकुर का 'साधना सम्मेलन' और जी. परमेश्वर को मुख्यमंत्री बनाने की मांग
कर्नाटक कांग्रेस सरकार के 3 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कल (19 मई) तुमकुर (Tumakuru) में एक विशाल 'साधना सम्मेलन' (Pragatiyatta Karnataka) आयोजित किया जा रहा है। मूल रूप से यह कार्यक्रम 20 मई को होना था, लेकिन परिवहन कर्मचारियों की संभावित हड़ताल के कारण इसे एक दिन पहले यानी मंगलवार को रख दिया गया।
इस सम्मेलन के वेन्यू (तुमकुर) ने राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है, क्योंकि यह गृह मंत्री डॉ. जी. परमेश्वर का गृह क्षेत्र है। सम्मेलन से ठीक पहले पूर्व मंत्री के.एन. राजन्ना के एक सनसनीखेज बयान ने पूरी कांग्रेस में खलबली मचा दी है:
"अगर हाईकमान राज्य में नेतृत्व परिवर्तन (सत्ता का हस्तांतरण) करने का फैसला लेता है, तो हमारी इच्छा है कि जी. परमेश्वर को अगला मुख्यमंत्री बनाया जाए। मुख्यमंत्री का पद किसी राजनेता की निजी संपत्ति नहीं है।"
— के.एन. राजन्ना, पूर्व मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता
राजन्ना ने 2013 के घटनाक्रमों की याद दिलाते हुए तीखे लहजे में कहा कि सिद्धारमैया का घर उनकी निजी संपत्ति नहीं बल्कि जनता की देन है, इसलिए पार्टी के हित में हाईकमान के फैसलों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हाईकमान के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर बेहद गंभीर चर्चाएं चल रही हैं।
सत्ता के दो ध्रुव: क्यों फंसा है हाईकमान का पेंच?
| नेता | ताकत/दावेदारी | वर्तमान स्थिति और रणनीति |
|---|---|---|
| सिद्धारमैया | जननेता, अहिंदा (AHINDA) वोट बैंक पर मजबूत पकड़। | अपनी कुर्सी बचाने और मंत्रिमंडल फेरबदल के जरिए पकड़ मजबूत करने की कोशिश में। |
| डी.के. शिवकुमार | संकटमोचक, बेहतरीन संगठनकर्ता, वोक्कालिगा समुदाय का चेहरा। | सरकार के 3 साल पूरे होने पर ढाई-ढाई साल के कथित फॉर्मूले को लागू करने का दबाव। |
| डॉ. जी. परमेश्वर | वरिष्ठ दलित चेहरा, बेदाग छवि, तुमकुर सम्मेलन के केंद्र बिंदु। | सिद्धारमैया विरोधी और बदलाव चाहने वाले गुटों के लिए 'डार्क हॉर्स' (सर्वसम्मत चेहरा) के रूप में उभरे। |
आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरलम के फैसलों के बाद अब कांग्रेस आलाकमान का पूरा ध्यान कर्नाटक के इस पावर टसल (Power Tussle) को सुलझाने पर है। तुमकुर के साधना सम्मेलन में जुटने वाली भीड़ और वहां नेताओं की 'बॉडी लैंग्वेज' से साफ हो जाएगा कि कर्नाटक की राजनीति आने वाले दिनों में किस करवट बैठने वाली है। फिलहाल, दिल्ली से हरी झंडी मिलने का इंतजार हर गुट को है।





