रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 का परिणाम घोषित होते ही राज्य में विवादों का एक नया बवंडर खड़ा हो गया है। 103 पदों के लिए 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया था, लेकिन इसके तुरंत बाद पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठने लगे। देखते ही देखते यह विवाद राजधानी रांची से लेकर पूरे राज्य में एक उग्र छात्र आंदोलन में बदल गया, जहाँ युवा अब भूख हड़ताल और सड़कों पर उतरकर भर्ती व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव की मांग कर रहे हैं।
विवाद की शुरुआत: कैसे भड़का छात्रों का असंतोष?
परिणाम जारी होते ही अभ्यर्थियों ने आयोग के सामने कई गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं:
कट-ऑफ और मेरिट लिस्ट की गोपनीयता: आयोग द्वारा श्रेणीवार कट-ऑफ सार्वजनिक नहीं किए गए। इसके अलावा प्रकाशित मेरिट सूची पर संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर न होने से सवाल उठे।
वायरल OMR शीट का सच: सोशल मीडिया पर वायरल ओएमआर शीट के जरिए दावा किया गया कि पेपर-1 में महज 48 प्रश्न हल करने वाले अभ्यर्थियों को भी मुख्य परीक्षा के लिए चुन लिया गया।
आंदोलन का रूप: बापू वाटिका से राज्यव्यापी हड़ताल तक
असंतोष बढ़ते ही छात्र जेपीएससी दफ्तर के बाहर जुटने लगे और फिर मोराबादी स्थित बापू वाटिका, अल्बर्ट चौक व जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम आंदोलन का केंद्र बन गए। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की गई।
छात्रों की प्रमुख मांगें:
14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को तत्काल रद्द कर दोबारा निष्पक्ष परीक्षा कराई जाए।
जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) की भर्ती प्रणाली में व्यापक ढांचागत सुधार हों।
परीक्षा कराने वाली एजेंसी 'टीडीपीएल' (TDPL) की सभी परीक्षाओं की समीक्षा और पूरे मामले की CBI जांच हो।
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय की जाए।
सरकार व आयोग का एक्शन: इस्तीफे, गिरफ्तारियां और परीक्षाएं स्थगित
बढ़ते दबाव के बीच मामले ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया:
अध्यक्ष का इस्तीफा: विवाद व जांच के बीच JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने 22 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
परीक्षाएं स्थगित: आयोग ने मुख्य परीक्षा सहित कुल 9 भर्ती परीक्षाओं को अगली सूचना तक स्थगित कर दिया है।
CID व SIT जांच: मामले की जांच सीआईडी (कांड संख्या 16/2026) के तहत गठित एसआईटी को सौंपी गई। कार्रवाई करते हुए पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह सहित 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सीआईडी ने सफल अभ्यर्थियों को 30 जुलाई से 5 अगस्त 2026 के बीच अपनी ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट का रुख और राजनीतिक हलचल
झारखंड हाईकोर्ट: उच्च न्यायालय ने फिलहाल किसी अंतरिम राहत (परीक्षा रद्द करने या मुख्य परीक्षा में शामिल होने) से इनकार करते हुए आयोग को 4 सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी।
सियासत तेज: विपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने सरकार पर हमला बोलते हुए JSSC-CGL और JPSC मामलों में बड़े घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि टीडीपीएल एजेंसी का मार्केटिंग मैनेजर खुद परीक्षा पास कर अधिकारी बन गया। भाजपा ने संसद तक में पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाई है, जबकि अन्य राजनीतिक दलों व संगठनों ने भी आंदोलनकारी छात्रों को समर्थन दिया है।
यह पहला मौका नहीं है जब JPSC विवादों में घिरी हो; पहली और दूसरी सिविल सेवा परीक्षा की गड़बड़ियों की सीबीआई जांच आज भी जारी है। फिलहाल, छात्र सीआईडी जांच को नाकाफी बताते हुए केंद्रीय एजेंसी (CBI) से जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं।





