कोलकाता/नई दिल्ली: भारतीय राजनीति के इतिहास में आज का दिन एक बड़े उलटफेर के रूप में दर्ज होने जा रहा है। पश्चिम बंगाल सहित चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनावी नतीजों ने देश की सियासी तस्वीर बदल दी है। बंगाल के रण में 'दीदी' का तिलस्म टूट गया है और भारतीय जनता पार्टी एक प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता के गलियारों में प्रवेश कर रही है।
भवानीपुर में बड़ा उलटफेर: शुभेंदु ने मुख्यमंत्री को दी मात
बंगाल चुनाव की सबसे हॉट सीट मानी जाने वाली भवानीपुर में हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके ही पूर्व सिपहसालार और भाजपा प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी ने एक कड़े मुकाबले में 15,114 वोटों के अंतर से पराजित कर दिया है।
शुरुआती 13 राउंड तक ममता बनर्जी बढ़त बनाए हुए थीं, लेकिन अंतिम राउंड्स की गिनती ने पासा पलट दिया। शुभेंदु अधिकारी की इस जीत ने उन्हें राज्य की राजनीति के नए 'जाइंट किलर' के रूप में स्थापित कर दिया है।
बंगाल में भाजपा का 'ऐतिहासिक' उदय
चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा ने 208 सीटों (156 जीत और 52 पर बढ़त) के साथ बहुमत के जादुई आंकड़े को पार कर लिया है।
कुल सीटें: 294 (मतदान 293 पर हुआ)
बहुमत का आंकड़ा: 147
भाजपा की स्थिति: 208 सीटें
इस जीत के साथ ही बंगाल में टीएमसी का 15 वर्षों का शासन समाप्त हो गया है। भाजपा ने न केवल शहरी क्षेत्रों में बल्कि टीएमसी के अभेद्य माने जाने वाले ग्रामीण गढ़ों में भी सेंध लगाकर अपनी पहली सरकार सुनिश्चित कर ली है।
केरल में भी बदलाव की आहट
बंगाल के साथ-साथ केरल से भी बड़े संकेत मिल रहे हैं। वहां UDF गठबंधन जीत के मुहाने पर खड़ा है, जो राज्य की सत्ता में बदलाव की ओर इशारा कर रहा है। अन्य राज्यों में भी मतगणना जारी है और पल-पल समीकरण बदल रहे हैं।
मुख्य आकर्षण:
ममता की हार: भवानीपुर में मुख्यमंत्री की अप्रत्याशित हार से टीएमसी खेमे में निराशा।
भाजपा की रणनीति सफल: ध्रुवीकरण और विकास के एजेंडे ने बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनाई।
नया नेतृत्व: शुभेंदु अधिकारी का कद बंगाल की राजनीति में और बढ़ा।
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