करनाल/अंबाला | विशेष संवाददाता: पश्चिमी एशिया (ईरान-अमेरिका संघर्ष) में जारी तनाव का सीधा असर अब हरियाणा की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। राज्य का ₹5,000 करोड़ का फार्मा और कॉस्मेटिक सेक्टर और विश्व प्रसिद्ध बासमती चावल निर्यात उद्योग इस समय सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। कच्चे माल की कमी और मालभाड़े में बेतहाशा बढ़ोतरी ने उत्पादन लागत को 90% तक बढ़ा दिया है।

1. फार्मा और मेडिकल डिवाइस: दवाइयां होंगी महंगी

हरियाणा के फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस सेक्टर की 250 से अधिक इकाइयां इस समय कच्चे माल (API) की कमी से जूझ रही हैं।

रा-मैटीरियल में उछाल: पैरासिटामोल का कच्चा माल ₹250 से बढ़कर ₹650 प्रति किलो हो गया है। एंटीबायोटिक्स और सर्जिकल आइटम की लागत में 30% की वृद्धि हुई है।

मेडिकल डिवाइस: डायग्नोस्टिक किट्स और सर्जिकल उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक की कीमतों में 50% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

पैकेजिंग संकट: दक्षिण कोरिया और अन्य देशों से आने वाला पैकेजिंग मैटीरियल समय पर नहीं पहुँच पा रहा है, जिससे उत्पादन ठप होने की कगार पर है।

2. बासमती चावल: निर्यातकों को करोड़ों का घाटा

भारत से होने वाले कुल चावल निर्यात का 75% हिस्सा खाड़ी देशों को जाता है, जो वर्तमान में युद्ध की चपेट में हैं।

कीमतों में गिरावट: निचले स्तर की बासमती किस्मों (RS-10, शरबती, ताज) के दाम ₹5 प्रति किलो तक गिर गए हैं। प्रीमियम किस्में (1121, 1509) भी ₹2 तक सस्ती हुई हैं।

शिपिंग की चुनौती: समुद्री मार्ग बाधित होने से कई खेप बीच समुद्र में फंसी हैं। निर्यातकों को अतिरिक्त डिटेंशन फीस और स्टोरेज लागत वहन करनी पड़ रही है।

राहत: ऑल इंडिया राइस एक्स्पोर्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश गोयल के अनुसार, सरकार ने कांडला पोर्ट पर 'डिटेंशन फीस' माफ कर बड़ी राहत दी है।

3. कॉस्मेटिक उद्योग: ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर महंगाई का साया

साबुन, शैंपू और क्रीम बनाने में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोकेमिकल आधारित पदार्थों की भारी कमी हो गई है।

तत्वों के दाम: सल्फर और प्रोपाइलीन ग्लाइकोल जैसे आवश्यक तत्वों की कीमतों में 70% से 90% का भारी उछाल आया है।

आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को इन मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है:

महंगा इलाज: पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स और सर्जिकल उपकरणों के महंगे होने से इलाज का खर्च बढ़ेगा।

रोजमर्रा की चीजें: शैंपू, क्रीम और साबुन जैसी ग्रॉसरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ना तय है।

बाजार में कमी: सप्लाई चेन टूटने से जीवन रक्षक दवाओं और कुछ खास कॉस्मेटिक ब्रांड्स की किल्लत हो सकती है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

"कच्चा माल मुख्य रूप से चीन और दक्षिण कोरिया से आता है। पश्चिमी एशिया में तनाव के कारण एयर और शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं। अगर यह संकट लंबा खिंचा, तो छोटे उद्योगों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।" — आरएल शर्मा, अध्यक्ष (हरियाणा फार्मास्युटिकल मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन)