भोपाल

मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक इतिहास में एक बड़ा कदम उठाते हुए विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) विधेयक को मंजूरी दे दी है। सोमवार को मानसून सत्र के दौरान सदन में पेश किए गए इस बिल को मंगलवार को विस्तृत चर्चा के बाद पारित कर दिया गया। सरकार का दावा है कि यह कानून बिना किसी धर्म या जातिगत भेदभाव के सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करेगा।

इसके साथ ही मध्य प्रदेश देश का ऐसा नया राज्य बन गया है, जो गोवा, उत्तराखंड और गुजरात जैसी UCC लागू करने या प्रक्रिया शुरू करने वाली सूची में शामिल हो गया है।

1. समान नागरिक संहिता (UCC) क्या है?

समान नागरिक संहिता का अर्थ है—देश या राज्य के प्रत्येक नागरिक के लिए एक जैसा कानून, चाहे उसका धर्म, पंथ या जाति कुछ भी हो।

UCC लागू होने के बाद मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में सभी धर्मों के पर्सनल लॉ की जगह एक साझा कानून प्रभावी हो जाता है:

विवाह और विवाह पंजीकरण (Marriage & Registration)

तलाक और भरण-पोषण (Divorce & Maintenance)

उत्तराधिकार और संपत्ति का बंटवारा (Inheritance & Succession)

बच्चा गोद लेना और संरक्षण (Adoption & Guardianship)

लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationships)

भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनसंघ के काल से ही UCC उनके प्राथमिक एजेंडे का हिस्सा रहा है और 2019 के लोकसभा चुनाव घोषणापत्र में भी इसे शामिल किया गया था।

2. संविधान क्या कहता है? (अनुच्छेद 44)

भारतीय संविधान के भाग IV के अंतर्गत अनुच्छेद 44 (Article 44) में समान नागरिक संहिता का स्पष्ट उल्लेख है, जो राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों (Directive Principles of State Policy) का हिस्सा है।

संविधान का निर्देश: "राज्य भारत के पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा।"

डॉ. बी.आर. आम्बेडकर का दृष्टिकोण: संविधान सभा की बहसों के दौरान डॉ. आम्बेडकर ने स्पष्ट कहा था कि देश की एकता और लैंगिक समानता के लिए UCC आवश्यक है, लेकिन शुरुआती चरण में इसे सामाजिक स्वीकृति के आधार पर धीरे-धीरे लागू किया जाना चाहिए।

3. UCC का इतिहास: औपनिवेशिक दौर से अब तक

1835 की ब्रिटिश रिपोर्ट: भारत में UCC की चर्चा ब्रिटिश काल से शुरू हुई। 1835 की रिपोर्ट में अपराधों, साक्ष्यों और अनुबंधों के लिए एकसमान भारतीय कानूनों की सिफारिश की गई, लेकिन अंग्रेजों ने हिंदुओं और मुसलमानों के 'पर्सनल लॉ' में हस्तक्षेप करने से परहेज किया।

1941 की बी.एन. राव समिति: ब्रिटिश सरकार ने हिंदू कानूनों को संहिताबद्ध करने के लिए बी.एन. राव समिति का गठन किया। इस समिति ने शास्त्रों के अध्ययन के आधार पर एक समान कानून की वकालत की, ताकि महिलाओं को संपत्ति व विवाह में समान अधिकार मिल सकें।

आजादी के बाद: 1950 के दशक में 'हिंदू कोड बिल' पारित किया गया, लेकिन सभी धर्मों के लिए एक सार्वभौमिक संहिता (UCC) राजनीतिक और सामाजिक बहसों के कारण लंबित रही।

मध्य प्रदेश के परिदृश्य में आगे क्या?

विधानसभा से पास होने के बाद अब इस विधेयक को राज्यपाल और तत्पश्चात राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। कानून का रूप लेने के बाद राज्य में विवाह के पंजीकरण से लेकर संपत्ति के उत्तराधिकार तक के सभी व्यक्तिगत मामलों का संचालन इसी नए कानून के तहत किया जाएगा।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की कानून-व्यवस्था को और चुस्त-दुरुस्त करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) पहुंचकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने प्रदेश में 18,000 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की जल्द भर्ती करने का ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि राज्य सरकार अब तक 25,000 पुलिसकर्मियों को पदोन्नति (प्रमोशन) दे चुकी है।

बैठक में पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने बताया कि वे मुख्य सचिव के साथ मिलकर पुलिस विभाग के सुदृढ़ीकरण के लिए लगातार समीक्षा कर रहे हैं और पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार हेतु आज ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

यूसीसी पर मुख्यमंत्री का स्टैंड: "मुस्लिम महिलाओं को मिलेगी राहत"

बैठक के उपरांत संवाददाताओं से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता (UCC) पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा:

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का वक्तव्य:

"UCC लागू होने से सबसे ज्यादा फायदा हमारी मुस्लिम बहनों को मिलेगा। इस ऐतिहासिक कानून के आने से उन्हें 'हलाला' जैसी कुप्रथाओं से हमेशा के लिए मुक्ति मिलेगी। राजनीतिक दलों और विपक्ष के नेताओं को भी संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठकर इस सुधारवादी बिल के समर्थन में आगे आना चाहिए।"

साथ ही, सीजेपी (CJP) को लेकर जारी केंद्रीय दिशानिर्देशों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में इसका कोई नकारात्मक असर नहीं है, क्योंकि उनकी सरकार सीधे धरातल पर जनता के बीच जाकर कार्य करने में विश्वास रखती है।

भोपाल में विरोध के स्वर: विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा गया ज्ञापन

एक तरफ जहाँ मुख्यमंत्री यूसीसी के फायदे गिना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश में इसका विरोध भी शुरू हो गया है। भोपाल के शहर काजी, शहर मुफ्ती तथा कांग्रेस विधायक आतिफ अकील एवं आरिफ मसूद के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की।

पुनर्विचार की मांग: प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा अध्यक्ष को एक ज्ञापन सौंपकर UCC प्रस्ताव पर फिर से विचार करने की मांग उठाई।

सर्वसम्मति पर जोर: मुस्लिम धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इतने संवेदनशील और बड़े सामाजिक फैसले को लागू करने से पहले सभी धर्मों और पक्षों की राय ली जानी चाहिए।

मुख्य बिंदु एक नज़र में

विषयनिर्णय / अद्यतन
नई पुलिस भर्तीजल्द ही 18,000 पदों पर होगी सीधी भर्ती
प्रमोशनअब तक 25,000 पुलिसकर्मियों की हो चुकी है पदोन्नति
UCC पर रुखमुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और कुप्रथा उन्मूलन का दावा
विपक्ष का रुखशहर काजी और स्थानीय विधायकों द्वारा पुनर्विचार की मांग

मुख्यमंत्री के इस आक्रामक रुख और विपक्षी प्रतिनिधिमंडल की सक्रियता ने मध्य प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।