भोपाल: उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश में भी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) यानी समान नागरिक संहिता को लेकर कवायद बेहद तेज हो गई है। राज्य में यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया को गति देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति आज (सोमवार) भोपाल पहुँच रही है। समिति का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा संतुलित और प्रभावी ड्राफ्ट तैयार करना है, जिसमें समाज के सभी वर्गों के हितों और सुझावों का पूरा ध्यान रखा जा सके।
नरोन्हा अकादमी में साढ़े सात घंटे का महामंथन
भोपाल स्थित नरोन्हा प्रशासनिक अकादमी में सुबह 10:30 बजे से लेकर शाम 6:00 बजे तक लगातार बैठकों का दौर चलेगा। इस दौरान समिति अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक संगठनों से सीधे संवाद कर उनकी राय जानेगी।
समिति ने जमीनी हकीकत और कानूनी पेचीदगियों को समझने के लिए राज्य के कई महत्वपूर्ण संवैधानिक और सामाजिक आयोगों को आमंत्रित किया है, जिनमें शामिल हैं:
महिला आयोग और बाल अधिकार संरक्षण आयोग
अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) आयोग
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग
सामान्य निर्धन वर्ग कल्याण आयोग
अल्पसंख्यक कल्याण से जुड़े आयोग
मिनट-टू-मिनट बैठक का शेड्यूल
| समय | बैठक/प्रस्तुति | हिस्सा लेने वाले प्रतिनिधि |
|---|---|---|
| सुबह 10:30 से | शुरुआती सत्र और आयोगों से चर्चा | विभिन्न सरकारी और सामाजिक आयोगों के प्रमुख |
| दोपहर 12:30 बजे | विभागीय प्रस्तुतियां (Presentations) | गृह विभाग, महिला एवं बाल विकास, एससी-एसटी और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी |
| दोपहर बाद | राजनीतिक विमर्श | राज्य के सभी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि |
| शाम 03:30 बजे | धार्मिक और सामाजिक संवाद | प्रमुख धर्मगुरु और विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि |
सभी पक्षों को साधने की अनूठी कोशिश
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की इस समिति का मानना है कि सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी से तैयार किया गया ड्राफ्ट ही सबसे ज्यादा असरदार और न्यायसंगत साबित होगा। यही वजह है कि प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर राजनीतिक दलों और धर्मगुरुओं तक, सभी को इस विचार-विमर्श की मेज पर एक साथ लाया जा रहा है।
शाम को होने वाली धर्मगुरुओं की बैठक को बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहाँ यूसीसी को लेकर विभिन्न समुदायों की शंकाओं को दूर करने और उनके सुझावों को ड्राफ्ट में शामिल करने पर चर्चा होगी। इस मैराथन बैठक के बाद मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता के भविष्य की रूपरेखा काफी हद तक साफ होने की उम्मीद है।





