न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की बहुप्रतीक्षित मांग को एक बार फिर रूस और मॉरीशस का मजबूत कूटनीतिक समर्थन मिला है। न्यूयॉर्क में आयोजित 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भाषण देते हुए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की स्थायी सीट की दावेदारी का खुलकर समर्थन किया।
इसे भी पढ़ेंः पश्चिम एशिया में गहराया संकट: ईरान का 7-दिवसीय प्रस्ताव और डोनाल्ड ट्रम्प का सख्त रुख
'ग्लोबल साउथ' का प्रतिनिधित्व बढ़े, पश्चिमी देशों का विरोध
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि वर्तमान विश्व व्यवस्था में 'ग्लोबल साउथ' की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण हो चुकी है, इसलिए सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए।
- जर्मनी और जापान पर निशाना: रूस ने स्पष्ट किया कि वह सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों की और सीटें बढ़ाने के सख्त खिलाफ है। लावरोव ने विशेष रूप से जर्मनी और जापान का नाम लेते हुए कहा कि ये देश सैन्यवाद की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
- वीटो पावर पर रुख: रूस ने यह भी साफ कर दिया कि सुरक्षा परिषद में सुधार के दौरान मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों की शक्तियों और वीटो (Veto) अधिकार को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
मॉरीशस और पुर्तगाल ने भी जताया भरोसा
रूस के अलावा मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने भी भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने G4 और L69 समूहों द्वारा सुरक्षा परिषद सुधार के प्रयासों की सराहना की। इसके अलावा यूरोपीय देश पुर्तगाल ने भी भारत को वीटो-पावर्ड काउंसिल में शामिल करने का समर्थन दोहराया है।
इसे भी पढ़ेंः भारत का पाकिस्तान पर तीखा पलटवार: 'झूठ दोहराने से सच नहीं बदलता, आतंकवाद के भुगतने होंगे गंभीर नतीजे'
जानिए सुरक्षा परिषद में सुधार का जटिल गणित
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कुल 15 सदस्य होते हैं, जिनमें 5 स्थायी सदस्य (अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस) और 10 अस्थायी सदस्य शामिल हैं। भारत अब तक 8 बार अस्थायी सदस्य के रूप में चुना जा चुका है।
- चार्टर में संशोधन जरूरी: UNSC का ढांचा बदलने के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन करना पड़ता है। इसके लिए महासभा के दो-तिहाई बहुमत के साथ-साथ वर्तमान के सभी 5 स्थायी सदस्य देशों (P-5) की सहमति अनिवार्य है।
- चीन बना सबसे बड़ा रोड़ा: यद्यपि रूस, अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देश भारत के समर्थन में आ चुके हैं, लेकिन P-5 में शामिल चीन लगातार भारत की स्थायी सदस्यता की राह में अड़ंगा लगाता आ रहा है। इसी कारण रूस के इस मजबूत समर्थन के बावजूद सुरक्षा परिषद के औपचारिक पुनर्गठन के लिए अभी व्यापक वैश्विक सहमति की आवश्यकता है।





