लखनऊ: उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद ने शुक्रवार को वर्ष 2026 की पूर्व मध्यमा (10वीं) और उत्तर मध्यमा (12वीं) परीक्षा के परिणाम जारी कर दिए हैं। इस वर्ष के परिणामों में न केवल उत्तीर्ण प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, बल्कि छात्राओं ने एक बार फिर शैक्षणिक श्रेष्ठता साबित करते हुए बालकों को पछाड़ दिया है।
प्रमुख टॉपर: कन्नौज और प्रतापगढ़ के मेधावियों ने मारी बाजी
परिणामों की घोषणा करते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव और सचिव शिव लाल ने बताया कि प्रदेश की मेरिट सूची में छोटे शहरों के मेधावियों ने शानदार प्रदर्शन किया है:
10वीं (पूर्व मध्यमा द्वितीय): राधा देवी आदर्श संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कन्नौज की सृष्टि ने 94.43% अंकों के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। प्रतापगढ़ की खुशबू ने भी शानदार अंक पाकर दूसरा स्थान हासिल किया।
12वीं (उत्तर मध्यमा द्वितीय): श्रीराम टहल संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, प्रतापगढ़ के रजनीश यादव ने 89.36% अंकों के साथ राज्य में टॉप किया।
छात्राओं का शानदार प्रदर्शन और बढ़ता ग्राफ
बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष उत्तीर्ण प्रतिशत में पिछले वर्ष की तुलना में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। विशेष रूप से तीनों श्रेणियों (10वीं, 11वीं और 12वीं) में बालिकाओं का पास प्रतिशत बालकों से अधिक रहा।
परीक्षाफल एक नज़र में:
| कक्षा | उत्तीर्ण प्रतिशत | पिछले वर्ष से वृद्धि | बालकों का पास % | बालिकाओं का पास % |
|---|---|---|---|---|
| 10वीं | 95.91% | +2.79% | 95.68% | 96.64% |
| 11वीं | 94.40% | +2.32% | 94.33% | 94.62% |
| 12वीं | 94.86% | +6.82% | 94.47% | 95.95% |
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त्वरित मूल्यांकन और पारदर्शी प्रक्रिया
परिषद सचिव शिवलाल ने बताया कि परीक्षाएं 19 से 28 फरवरी तक प्रदेश के 241 केंद्रों पर आयोजित की गई थीं। महज 10 दिनों की परीक्षा के बाद, 7 से 20 मार्च के बीच रिकॉर्ड समय में मूल्यांकन कार्य पूरा किया गया। बोर्ड ने पारदर्शी प्रक्रिया अपनाते हुए दो महीने के भीतर परिणाम घोषित कर एक मिसाल पेश की है।
श्रेणीवार सफलता का विवरण
इस वर्ष कुल 55,822 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 45,673 परीक्षा में शामिल हुए और 41,363 ने सफलता हासिल की।
10वीं: 14,199 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए।
12वीं: 5,661 विद्यार्थियों ने प्रथम और 6,087 ने द्वितीय श्रेणी प्राप्त की।
"संस्कृत शिक्षा के प्रति छात्रों का बढ़ता रुझान और बेहतर परिणाम यह दर्शाते हैं कि हमारी प्राचीन भाषा का भविष्य उज्ज्वल है। विशेष रूप से छात्राओं की सफलता समाज के लिए प्रेरक है।" — डॉ. महेंद्र देव, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा





