चंडीगढ़/कुरुक्षेत्र: हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणू भाटिया की एक कथित टिप्पणी ने इस समय देश भर के नर्सिंग समुदाय में आक्रोश की आग भड़का दी है। कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश (LNJP) अस्पताल में एक डॉक्टर द्वारा नाबालिग से दुष्कर्म के मामले के बाद नर्सिंग स्टाफ पर उठाए गए सवालों से नाराज नर्सिंग ऑफिसर्स अब सड़कों पर उतर आए हैं।

सोमवार को कुरुक्षेत्र अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने दो घंटे की हड़ताल कर जमकर नारेबाजी की। वहीं, आंदोलन को धार देते हुए 'हरियाणा नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन' की प्रधान विनीता कुमारी ने मंगलवार से पूरे प्रदेश में सुबह 10 से 12 बजे तक 'पेन डाउन स्ट्राइक' (कार्य बहिष्कार) का बड़ा आह्वान कर दिया है।

रोहतक PGI से दिल्ली तक विरोध की गूंज

इस विवाद की गूंज अब दिल्ली और बड़े चिकित्सा संस्थानों तक पहुंच चुकी है:

काले बिल्ले लगाकर प्रदर्शन: रोहतक पीजीआईएमएस (PGIMS) के नर्सिंग स्टाफ ने दो दिनों तक काले बिल्ले लगाकर शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करने का एलान किया है।

मुख्यमंत्री को पत्र, कार्रवाई की मांग: ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष रिंकी डांग ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को एक सख्त पत्र लिखा है। पत्र में चेयरपर्सन रेणू भाटिया को तुरंत पद से हटाने और उनके खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की गई है।

क्या था पूरा मामला? क्यों भड़का विवाद?

दरअसल, रविवार को चेयरपर्सन रेणू भाटिया कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग से मिलने पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने मीडिया व अन्य माध्यमों से नर्सिंग स्टाफ की भूमिका पर सवाल उठाए थे।

चेयरपर्सन का तर्क: रेणू भाटिया का कहना था कि जिस चिकित्सक पर पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हों, उसके पास नाबालिग पीड़िता को अकेला क्यों छोड़ा गया? इसमें नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही है।

नर्सिंग फेडरेशन का पलटवार: फेडरेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष रिंकी डांग ने पत्र में स्पष्ट किया कि आरोपी चिकित्सक ने महिला मरीज की जांच के दौरान तय प्रोटोकॉल (जिसके तहत महिला अटेंडेंट या अन्य हेल्थकेयर प्रोफेशनल की मौजूदगी अनिवार्य होती है) का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि चेयरपर्सन ने असली दोषी पर सख्त रुख अपनाने के बजाय नर्सिंग प्रोफेशन पर गलत, बेबुनियाद और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी की है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने के आसार

नर्सिंग समुदाय का कहना है कि वे चौबीसों घंटे मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं, ऐसे में शीर्ष पदों पर बैठे लोगों द्वारा बिना पूरी सच्चाई जाने उन पर उंगली उठाना उनके स्वाभिमान पर चोट है। राज्य भर में शुरू हो रहे 'पेन डाउन स्ट्राइक' और विरोध प्रदर्शनों के कारण आने वाले दिनों में सरकारी अस्पतालों की ओपीडी और अन्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस मामले में क्या हस्तक्षेप करता है।