मालदा/हरिश्चंद्रपुर: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक 43 वर्षीय गृहिणी ने केवल इसलिए अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली क्योंकि नई मतदाता सूची (Electoral Roll) में उनका नाम "अंडर एडजुडिकेशन" (विचाराधीन) श्रेणी में डाल दिया गया था। इस घटना ने पूरे इलाके में कोहराम मचा दिया है और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मृतका की पहचान हज़ेरा बीबी के रूप में हुई है, जो हरिश्चंद्रपुर-2 ब्लॉक के शीतलपुर गांव की निवासी थीं। शनिवार को जब चुनाव आयोग ने अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की, तो हज़ेरा बीबी ने पाया कि उनका नाम अभी भी 'अंडर एडजुडिकेशन' की श्रेणी में है।
सदमा: परिजनों के अनुसार, नाम कटने के डर से वह गहरे सदमे में चली गईं और रविवार को उन्होंने कीटनाशक गटक लिया।
अंतिम सांस: उन्हें तुरंत मालदा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (MMCH) ले जाया गया, जहाँ सोमवार शाम इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
'चुनाव आयोग की लापरवाही' पर सियासी घमासान
इस दुखद घटना ने मालदा की राजनीति में उबाल ला दिया है। राज्य के मंत्री तजमुल हुसैन ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला।
"चुनाव आयोग के मनमाने फैसलों ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है। हजारों वोटर्स को 'अंडर एडजुडिकेशन' में रखकर आयोग ने गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया है। भाजपा के प्रभाव में आकर की गई इस कार्रवाई ने आज एक जान ले ली।" — तजमुल हुसैन, राज्य मंत्री
गांव वालों का फूटा गुस्सा: "चुनाव का बहिष्कार करेंगे"
मंगलवार सुबह हरिश्चंद्रपुर के सलालपुर गांव में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। लगभग 100 ग्रामीणों ने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के घर के बाहर जमकर प्रदर्शन किया।
हैरान करने वाले आंकड़े: प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उनके बूथ (संख्या 86) के 1,291 मतदाताओं में से 540 का नाम 'अंडर एडजुडिकेशन' में डाल दिया गया है।
BLO भी पीड़ित: चौंकाने वाली बात यह है कि खुद बीएलओ (BLO) मुनब्बर हुसैन का नाम भी इसी श्रेणी में है। उन्होंने कहा, "मैंने सभी दस्तावेज जमा किए थे, फिर भी मेरा और उन सभी का नाम अधर में लटका दिया गया जिन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया था।"
बहिष्कार की चेतावनी: ग्रामीणों ने हाथों में "विधानसभा चुनाव का बहिष्कार" की तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि यदि उनके नाम सही नहीं हुए, तो वे वोट नहीं डालेंगे।
क्या होता है 'अंडर एडजुडिकेशन'?
इसका सीधा अर्थ है कि मतदाता के दस्तावेजों या पात्रता पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और मामला जाँच के अधीन है। हालांकि, तकनीकी भाषा का यह शब्द ग्रामीण इलाकों में 'नागरिकता खोने' या 'वोटिंग अधिकार छिनने' के डर के रूप में देखा जा रहा है।





