मालदा: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में चुनाव आयोग (EC) के निर्देशानुसार मतदाता सूची के पूरक विवरण (Supplementary List) में नाम न होने की चुनौती देने के लिए एक 'अस्थाई ट्रिब्यूनल' की व्यवस्था की गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पिछले तीन दिनों से कई मतदाता और वकील जिला कलेक्टरेट के बाहर चक्कर काट रहे हैं, पर उनकी अर्जी लेने वाला कोई नहीं है।

मुख्य मुद्दे और मानवीय संकट

छूटते नाम: सुजापुर विधानसभा के मेडिकल प्रतिनिधि जाकिर हुसैन बिस्वास जैसे कई लोग परेशान हैं। उनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम सूची में हैं, लेकिन उनका नाम गायब कर दिया गया है।

समय का अभाव: नियम के अनुसार, पूरक सूची प्रकाशित होने के 15 दिनों के भीतर अपील दर्ज करनी होगी। 72 घंटे पहले ही बीत चुके हैं और बीच में रामनवमी जैसी छुट्टियां होने से समय और कम हो गया है।

प्रशासनिक उदासीनता: वकील वसीम अक्रम 75 किमी दूर चंचल से अपने क्लाइंट्स के दस्तावेज लेकर आए, लेकिन उन्हें एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर भटकाया गया। जिला चुनाव विभाग के अधिकारियों ने इस पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है।

सियासी घमासान: आरोप-प्रत्यारोप

इस मुद्दे ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है:

TMC और लेफ्ट: तृणमूल कांग्रेस के मालदा जिला अध्यक्ष अब्दुर रहीम बख्शी ने आरोप लगाया है कि भाजपा 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) के नाम पर अल्पसंख्यक समुदाय को परेशान कर रही है। कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की आलोचना की है।

भाजपा का रुख: भाजपा के जिला महासचिव नीलांजन दास ने इन आरोपों को नकारा है और कहा है कि अन्य पार्टियों ने SIR प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि ट्रिब्यूनल जल्द काम शुरू करेगा।

मौजूदा स्थिति: क्या है समाधान?

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, ट्रिब्यूनल को सक्रिय करने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन देरी ने लोगों में 'असुरक्षा' और 'डर' पैदा कर दिया है। मतदाता केवल यह चाहते हैं कि उनकी बात सुनी जाए ताकि वे अपना नागरिकता का अधिकार और वोट डालने का मौका न खोएं।