कोलकाता/नई दिल्ली | पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर सत्ता का संग्राम अगले महीने शुरू होने जा रहा है। निर्वाचन आयोग (EC) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिए हैं कि इस बार राज्य में चुनाव दो चरणों में संपन्न कराए जा सकते हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय नई दिल्ली में होने वाली उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया जाएगा, लेकिन आयोग की तैयारियों का झुकाव कम चरणों में चुनाव कराने की ओर है।
राजनीतिक दलों और प्रशासन की राय
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और आयोग के अधिकारियों की कोलकाता में हुई हालिया बैठकों के बाद यह रणनीति उभर कर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार:
विपक्ष की मांग: सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को छोड़कर, राज्य के अधिकांश राजनीतिक दलों ने एक या दो चरणों में ही मतदान कराने का सुझाव दिया है।
सुरक्षा बलों का रुख: प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षा बलों ने भी कम चरणों में चुनाव कराने के पक्ष में अपनी राय दी है।
हिंसा पर लगाम लगाने की रणनीति
चुनाव आयोग का मानना है कि दो चरणों में चुनाव कराने से चुनावी हिंसा को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिलेगी। अधिकारी के मुताबिक:
"जब चुनाव कम समय और चरणों में होते हैं, तो उपद्रवियों को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाकर गड़बड़ी फैलाने का मौका नहीं मिलता। शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कारक साबित होगा।"
महाराष्ट्र का उदाहरण और बंगाल की चुनौती
जब अधिकारी से पूछा गया कि क्या चुनाव एक ही चरण में संभव हैं, तो उन्होंने 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (288 सीटें) का उदाहरण दिया, जहाँ एक ही चरण में मतदान संपन्न हुआ था। उन्होंने कहा कि बंगाल में भी यह असंभव नहीं है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों और कानून-व्यवस्था को देखते हुए 'दो चरण' सबसे व्यावहारिक विकल्प नजर आ रहे हैं।
कड़ी निगरानी का आश्वासन
पश्चिम बंगाल सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने चुनाव आयोग को भरोसा दिलाया है कि चुनाव पूर्व और चुनाव के बाद की अवधि के दौरान कानून-व्यवस्था पर पैनी नजर रखी जाएगी। आयोग के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय मतदान के दौरान शांति बनाए रखना है, जिसके लिए केंद्रीय बलों की तैनाती और सुरक्षा ग्रिड को लेकर विस्तृत चर्चा की जा रही है।





