कोलकाता | समाचार सेवा पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील करने की प्रक्रिया रविवार से आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग ने इसके लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है। हालांकि, तकनीकी जानकारी के अभाव और ऑफलाइन आवेदन की स्पष्ट प्रक्रिया न होने के कारण लाखों मतदाताओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
न्यायिक ट्रिब्यूनल और समय-सीमा का पेंच
आयोग ने अपीलों की सुनवाई के लिए राज्य भर में 19 न्यायिक ट्रिब्यूनल का गठन किया है। सप्लीमेंट्री लिस्ट में स्पष्ट निर्देश है कि नाम कटने के विरुद्ध दो सप्ताह के भीतर अपील दायर करनी होगी।
मुख्य चुनौतियाँ:
समय-सीमा की अस्पष्टता: यह स्पष्ट नहीं है कि 'दो सप्ताह' की गिनती किस तारीख से शुरू होगी।
डिजिटल डिवाइड: ग्रामीण क्षेत्रों के वे मतदाता जो तकनीक के जानकार नहीं हैं, ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग करने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।
अधिकारियों में भ्रम: जमीनी स्तर पर काम कर रहे बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के पास मतदाताओं के सवालों की बाढ़ आ गई है, लेकिन उनके पास भी ऑफलाइन प्रक्रिया को लेकर विस्तृत जानकारी का अभाव है।
चौथी सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी: लाखों नाम खारिज
चुनाव आयोग ने रविवार को अपनी चौथी सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी की। आंकड़ों के अनुसार:
लगभग 60 लाख नामों की न्यायिक समीक्षा चल रही थी।
ताजा लिस्ट में करीब 2 लाख नामों को शामिल किया गया है।
न्यायिक अधिकारियों द्वारा निपटाए गए 40 लाख मामलों में से करीब 18 लाख आवेदन खारिज कर दिए गए हैं।
जमीनी हकीकत: मतदाताओं की बढ़ती चिंता
निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के अनुसार, अपील डीएम (DM), एसडीएम (SDM) या एसडीओ (SDO) कार्यालय में ऑफलाइन भी जमा की जा सकती है, जिन्हें बाद में अधिकारियों द्वारा पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। लेकिन धरातल पर इसकी कोई निश्चित समय-सीमा या प्रक्रिया तय नहीं होने से लोग परेशान हैं।
"मुझे तकनीक की समझ नहीं है, इसलिए मैं खुद ऑनलाइन अपील नहीं कर सकती। मुझे नहीं पता कि ऑफलाइन आवेदन कब और कहाँ शुरू होगा।" — रोजीना खातून, मतदाता (पूर्वी बर्द्धमान)
मुर्शिदाबाद और धुलियान जैसे क्षेत्रों से भी ऐसी ही खबरें आ रही हैं, जहाँ मतदाता अपने वोट देने के अधिकार को बचाने के लिए जिला कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। कई मामलों में पिता के नाम की स्पेलिंग जैसी छोटी मानवीय त्रुटियों के कारण भी नाम काट दिए गए हैं।
BLO पर बढ़ा दबाव
जोड़ासांको के एक BLO बप्पादित्य गुहा ने बताया कि उनके क्षेत्र से 46 नाम हटाए गए हैं। मतदाताओं के प्रति जवाबदेही और उनके भरोसे के कारण BLOs भी दबाव में हैं, क्योंकि वे लोगों को ठोस जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।





