लखनऊ | उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण को अपनी सामाजिक न्याय नीति के केंद्र में रखते हुए ऐतिहासिक सुधारों की घोषणा की है। सरकार ने न केवल पेंशन राशि में भारी बढ़ोतरी की है, बल्कि पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाकर भ्रष्टाचार की जड़ों पर प्रहार किया है।

पेंशन में ऐतिहासिक उछाल

विधानपरिषद में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने बताया कि:

वर्ष 2017 से पहले दिव्यांग पेंशन मात्र 300 रुपये प्रतिमाह थी।

योगी सरकार ने इसे तीन गुना से अधिक बढ़ाकर अब 1,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है।

यह राशि PFMS पोर्टल के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों (DBT) में भेजी जा रही है, जिससे बिचौलियों का खेल खत्म हो गया है।

'शून्य लंबित' लक्ष्य की प्राप्ति

मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि सरकार की सक्रियता के चलते 31 दिसंबर 2025 तक कोई भी पात्र लाभार्थी पेंशन के लिए लंबित नहीं है। अकेले आकांक्षी जिले सिद्धार्थनगर में 31 जनवरी 2026 तक 24,414 यूडीआईडी (UDID) कार्ड जारी किए जा चुके हैं। चालू वित्तीय वर्ष में हजारों दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं।

पात्रता और पारदर्शिता के कड़े मानक

पेंशन योजना के लाभ के लिए मंत्री कश्यप ने स्पष्ट दिशा-निर्देश साझा किए:

दिव्यांगता: न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता अनिवार्य।

आय सीमा: ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ₹46,080 और शहरी क्षेत्रों के लिए ₹56,460 से कम वार्षिक आय।

डिजिटल आवेदन: सभी आवेदन एकीकृत सामाजिक पेंशन पोर्टल पर ऑनलाइन स्वीकार किए जाते हैं।

मंत्री का कड़ा रुख: "विभाग में दलालों के लिए कोई जगह नहीं है। यदि कोई दिव्यांगजन कार्यालय आने में असमर्थ है, तो अधिकारी स्वयं उनके घर जाकर आवेदन की प्रक्रिया पूरी करेंगे।"

शिक्षकों की पदोन्नति और विशेष विद्यालय

शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने कदम बढ़ाए हैं। विभाग के विशेष विद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षकों की पदोन्नति का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेज दिया गया है। साथ ही, यह सुनिश्चित किया गया है कि दिव्यांग कल्याण के कार्यक्रमों में सभी स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी अनिवार्य हो।