लखनऊ:

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी गोटियां बिछाना शुरू कर दिया है। इस कड़ी में आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी राज्य में अपनी रणनीति बदलने के साफ संकेत दिए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने स्पष्ट किया है कि आम आदमी पार्टी 2022 के चुनावों में की गई अपनी गलतियों से सबक लेते हुए इस बार यूपी की सभी 349 सीटों पर चुनाव लड़ने की पुरानी गलती नहीं दोहराएगी।

लखनऊ में समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) से बातचीत करते हुए संजय सिंह ने कहा कि इस बार पार्टी केवल 'चुनाव में उतरने' के लिए उम्मीदवार नहीं उतारेगी, बल्कि जिन सीटों को चुना जाएगा, वहां पूरी ताकत और मजबूती से चुनाव लड़ा जाएगा।

2022 के नतीजों से सबक, निकाय चुनावों की सफलता से उम्मीद

2022 के विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए संजय सिंह ने स्वीकार किया कि तब परिणाम आप (AAP) के पक्ष में नहीं रहे थे और पार्टी को 1 फीसदी से भी कम वोट शेयर मिला था। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके बाद हुए नगर निकाय (नगर पालिका व नगर निगम) चुनावों में आम आदमी पार्टी ने शानदार वापसी की है।

संजय सिंह ने आंकड़े साझा करते हुए बताया:

  • निकायों में पकड़: AAP ने उत्तर प्रदेश में करीब 250 से 300 पार्षद व सभासद जीते हैं।
  • चेयरमैन पद पर जीत: रामपुर और बरसाना जैसी महत्वपूर्ण नगर पालिकाओं सहित करीब 10 स्थानों पर आप के चेयरमैन चुने गए हैं।
  • जमीनी सक्रियता: निकाय चुनावों के बाद से पार्टी उत्तर प्रदेश में लगातार सक्रिय है और शिक्षा, पानी, बिजली व स्थानीय मुद्दों पर पदयात्राएं व आंदोलन कर रही है।

उन्होंने कहा कि पार्टी का अंतिम सीट-फॉर्मूला और उम्मीदवारों की सूची राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और राजनीतिक मामलों की समिति (PAC) द्वारा तय की जाएगी।

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कांग्रेस और सपा के सीट शेयरिंग विवाद पर साधा निशाना

इंटरव्यू के दौरान संजय सिंह ने समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के बीच जारी सीट बंटवारे की खींचतान पर भी खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस द्वारा 150 से 200 सीटों की मांग को 'अव्यावहारिक' और 'अतार्किक' बताया।

संजय सिंह ने तंज कसते हुए कहा:

"पिछले चुनाव में कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में महज 2.5% वोट मिले थे और उसने केवल 2 सीटें जीती थीं। अब इस आधार पर कांग्रेस को कितनी सीटें मिलनी चाहिए, यह कांग्रेस और अखिलेश यादव को आपस में बैठकर तय करना चाहिए। लेकिन केवल 2 सीटें जीतने के बाद अगर आप 200 सीटें मांग रहे हैं, तो सोचिए—अगर आपने सपा की तरह 111 सीटें जीती होतीं, तो आप 1,000 सीटों की मांग करते! मांग हमेशा तर्कसंगत होनी चाहिए।"

2027 के लिए 'सिलेक्टिव और स्ट्रॉन्ग' रणनीति

आम आदमी पार्टी की नई घोषणा से साफ है कि 2027 के चुनाव में आप पूरे प्रदेश में बिखरने के बजाय चुनिंदा, प्रभाव वाली और मजबूत सीटों पर ही अपना ध्यान केंद्रित करेगी। पार्टी राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी, महंगाई और बिजली-पानी के मुद्दों को लेकर जन-आक्रोश रैलियों के जरिए जनता के बीच पहुंच रही है।

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