रियाद:
तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए बहुचर्चित 'मक्का समझौते' (Makkah Agreement) की शर्तें पहली बार सार्वजनिक हो गई हैं। अगस्त 2026 में सऊदी अरब के रियाद में संपन्न हुए इस रक्षा समझौते में कुल 16 अनुच्छेद हैं, जिन्हें अरबी, टर्किश और अंग्रेजी—इन तीन भाषाओं में तैयार किया गया है। सैन्य विशेषज्ञों द्वारा इसे 'इस्लामिक नाटो' की संज्ञा दी जा रही है।
मक्का समझौते के मुख्य बिंदु और शर्तें
- बाहरी आक्रमण पर संयुक्त जवाबी कार्रवाई (अनुच्छेद 1):
- समझौते के पहले अनुच्छेद के अनुसार, यदि तीनों देशों (पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की) में से किसी एक पर भी कोई बाहरी आक्रमण होता है, तो सबसे पहले शांति और सुलह के प्रयास किए जाएंगे। यदि बात नहीं बनती है, तो तीनों देश मिलकर उस बाहरी शक्ति के खिलाफ संयुक्त रूप से जवाबी हमला करेंगे।
- अस्तित्व खतरे में होने पर परमाणु हथियार का प्रावधान (अनुच्छेद 2):
- इस समझौते का सबसे संवेदनशील पहलू इसका दूसरा अनुच्छेद है। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए कहा गया है कि यदि किसी देश को यह महसूस होता है कि उसका अस्तित्व खतरे में है, तो वह परमाणु हथियार का इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि, दस्तावेजों में यह भी सलाह दी गई है कि देशों को ऐसी स्थिति से बचने का प्रयास करना चाहिए।
- खुफिया जानकारी साझा करना और सैन्य तैनाती (अनुच्छेद 5):
- रक्षा संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए अनुच्छेद 5 में यह प्रावधान किया गया है कि तीनों देश समय-समय पर एक-दूसरे के साथ खुफिया जानकारियां साझा करेंगे और संयुक्त युद्धाभ्यास (Military Exercises) करेंगे। इस व्यवस्था के तहत पाकिस्तान अपने कुछ सैनिकों को सऊदी अरब में तैनात भी रखेगा।
- मुख्यालय और समझौता कभी न खत्म होने की शर्त (अनुच्छेद 16):
- समझौते के अंतिम यानी 16वें अनुच्छेद में स्पष्ट किया गया है कि यह समझौता कभी समाप्त नहीं होगा। इसका आधिकारिक मुख्यालय सऊदी अरब के रियाद में होगा और इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा, जिसके प्रमुख को 'महासचिव' कहा जाएगा।
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यह समझौता क्यों है बेहद अहम?
वर्तमान भू-राजनीतिक हालात को देखें तो यह सैन्य समझौता इन तीनों देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
- सऊदी अरब: ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों का सामना कर रहा है।
- तुर्की: इजराइल के साथ बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं से घिरा हुआ है।
- पाकिस्तान: अफगानिस्तान के साथ सीमा पर संघर्ष और आतंकवाद से जुड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है।
इन तमाम सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए अगस्त 2026 में इन तीनों देशों ने मिलकर इस 'मक्का डिफेंस पैक्ट' पर हस्ताक्षर किए। जिस प्रकार शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ को रोकने के लिए अमेरिका और पश्चिमी देशों ने 'नाटो' (NATO) का गठन किया था, उसी तर्ज पर इस नए त्रिपक्षीय गठबंधन को रक्षा गलियारों में 'इस्लामिक नाटो' के रूप में देखा जा रहा है।
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