जम्मू-कश्मीर:
सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती पुंछ जिले में एक बड़े आतंकवादी ठिकाने का भंडाफोड़ करते हुए भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की है। दूसरी ओर, न्यायपालिका के स्तर पर एक अहम फैसले में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने जन सुरक्षा कानून (PSA) के दुरुपयोग पर कड़ी टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि सामान्य आपराधिक मामलों में एहतियातन हिरासत का सहारा नहीं लिया जा सकता।
पुंछ में आतंकी ठिकाने से विस्फोटक और संदिग्ध सामग्रियां बरामद
खुफिया और सुरक्षा तंत्र को मिली एक बड़ी कामयाबी के तहत, 156 टेरिटोरियल आर्मी से प्राप्त पुख्ता सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने मेंढर तहसील के कसबलारी इलाके में एक संयुक्त तलाशी अभियान चलाया।
- विस्फोटक से भरे कंटेनर: तलाशी के दौरान टेप से लिपटे सात कंटेनरों में विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है, जिनमें इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोइज डिवाइस (IED) होने की गहरी आशंका जताई जा रही है।
- अन्य बरामद सामान: इन कंटेनरों के अलावा मौके से एक काला बैग, एक काम्बैट पाउच, काले रंग का लोहे का बॉक्स, एक मैगजीन (7.62 एमएम एलएमजी से संबंधित होने की आशंका), एक एल्युमिनियम कंटेनर, दो पावर एडाप्टर और एक टिफिन बरामद किया गया है।
- बढ़ती चिंताएं: नियंत्रण रेखा (LoC) के पास स्थित होने और दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण पुंछ बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। पिछले 10 दिनों के भीतर पुंछ और राजौरी जिलों में हथियारों और गोला-बारूद की बरामदगी का यह चौथा मामला है। इससे पहले विजयादशमी के दिन एक मंदिर की छत पर ग्रेनेड मिलने और चोर हिल व साब्जियां क्षेत्रों में भी ठिकाने मिलने से सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।
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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट का कड़ा रुख: सामान्य अपराधों में PSA का उपयोग गलत
एक अन्य महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम में, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने जन सुरक्षा कानून (PSA) के तहत की जाने वाली हिरासत को लेकर एक सख्त फैसला सुनाया है।
- हाईकोर्ट की खंडपीठ का आदेश: चीफ जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस मोहम्मद यूसुफ वानी की खंडपीठ ने कुलगाम के निवासी तारिक की हिरासत को रद्द करते हुए उसे तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने 25 सितंबर 2026 को सिंगल बेंच के उस फैसले को भी खारिज कर दिया जिसमें हिरासत को सही ठहराया गया था।
- मामला क्या था: जिला मजिस्ट्रेट कुलगाम ने 13 दिसंबर 2025 को तारिक पर पीएसए लगाया था। उस पर कुलगाम, अनंतनाग और शोपियां में मवेशी चोरी, सेंधमारी जैसे 11 आपराधिक मामले दर्ज थे। प्रशासन का तर्क था कि इन घटनाओं से जनता में असुरक्षा का माहौल है।
- अदालत की मुख्य टिप्पणी: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सामान्य आपराधिक मामलों को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बताकर किसी व्यक्ति को पीएसए के तहत हिरासत में नहीं रखा जा सकता। यदि ऐसे मामलों से निपटने के लिए सामान्य कानूनी प्रक्रिया पर्याप्त है, तो एहतियातन हिरासत का सहारा लेना न्यायसंगत नहीं है।
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