ढाका:

बांग्लादेश में गारमेंट (कपड़ा) मजदूरों का वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी है। राजधानी ढाका के मीरपुर इलाके में सोमवार सुबह कुछ फैक्ट्रियों में कामकाज आंशिक रूप से शुरू तो हुआ, लेकिन कुछ ही देर बाद मजदूर दोबारा सड़कों पर उतर आए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

वर्ष 2024 के राजनीतिक उथल-पुथल के बाद अब प्रधानमंत्री ताहिर के सामने यह नया और बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सत्ता पक्ष का दावा है कि इन प्रदर्शनों के पीछे 'अवामी लीग' का हाथ है, क्योंकि मजदूरों पर उसकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। आइए जानते हैं कि दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गारमेंट निर्यातक होने के बावजूद बांग्लादेश अपने मजदूरों की सैलरी क्यों नहीं बढ़ा पा रहा है और इस पूरे विवाद के पीछे की असली वजहें क्या हैं।

कितना बड़ा है बांग्लादेश का गारमेंट कारोबार?

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली रेडीमेड गारमेंट इंडस्ट्री के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:

  • फैक्ट्रियां और रोजगार: देश में करीब 4,000 रजिस्टर्ड कपड़ा फैक्ट्रियां हैं, जिनमें 40 लाख से अधिक मजदूर (विशेषकर बड़ी संख्या में महिलाएं) काम करते हैं।
  • वैश्विक हिस्सेदारी: यहां तैयार होने वाले कपड़े दुनिया के करीब 150 देशों में निर्यात किए जाते हैं।
  • आर्थिक योगदान: वर्ष 2025-26 में इस सेक्टर से करीब 3,870 करोड़ डॉलर का एक्सपोर्ट हुआ है। देश के कुल निर्यात में इस इंडस्ट्री की हिस्सेदारी 80% से अधिक है और इसका सालाना कारोबार लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का है।

मजदूरों की सैलरी क्यों नहीं बढ़ पा रही है? मुख्य कारण:

1. महंगाई के मुकाबले बेहद कम मजदूरी

फिलहाल बांग्लादेश में कपड़ा फैक्ट्रियों के मजदूरों का न्यूनतम मासिक वेतन 12,500 टका (भारतीय मुद्रा में करीब 8,800 से 9,500 रुपये) है।

  • मांग: बढ़ती महंगाई को देखते हुए मजदूर इस न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 30,000 टका (करीब 23,000 रुपये प्रतिमाह) करने की मांग कर रहे हैं।
  • मुश्किलें: मजदूरों का कहना है कि घर का किराया, राशन और बिजली का बिल चुकाना इस मामूली आय में असंभव हो गया है।

2. फैक्ट्री मालिकों पर लागत का दबाव

बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपड़ों की कीमतों को लेकर जबरदस्त कॉम्पिटिशन है। ऐसे में कंपनियों के लिए रातोंरात मजदूरी में भारी बढ़ोतरी करना आर्थिक रूप से बेहद कठिन है, क्योंकि इससे वैश्विक खरीदारों के बीच उनकी प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ सकती है।

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3. महंगी ऊर्जा और उत्पादन लागत

फैक्ट्रियों को लगातार चलाने के लिए नियमित बिजली और गैस की आवश्यकता होती है। बांग्लादेश में ऊर्जा की बढ़ती कीमतें, ईंधन के आयात पर निर्भरता और अनिश्चित सप्लाई के कारण उत्पादन लागत लगातार ऊपर जा रही है, जिसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और वेतन देने की क्षमता पर पड़ रहा है।

4. राजनीतिक अस्थिरता और जटिल प्रक्रिया

वर्ष 2024 के सत्ता परिवर्तन के बाद से देश में राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है। बार-बार होने वाले विरोध प्रदर्शनों और फैक्ट्रियों के बंद होने से समय पर विदेशी आर्डर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा, वेतन तय करने वाली सरकारी 'वेज बोर्ड' की प्रणाली पर भी मजदूर संगठन समय पर समीक्षा न करने का आरोप लगाते आए हैं।

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