नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर (GDP Growth Rate) के अनुमान में बड़ा इजाफा किया है। केंद्रीय बैंक द्वारा जारी हालिया मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के मिनट्स (कार्यवृत्त) के अनुसार, वर्ष 2026-27 के लिए भारतीय इकोनॉमी की ग्रोथ रेट अब 7.1% रहने का अनुमान जताया गया है, जो कि अगस्त महीने में लगाए गए 6.7% के आंकड़े से 40 बेसिस पॉइंट्स (bps) अधिक है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने यह भी चेतावनी दी है कि बढ़ती महंगाई का दबाव इस अनुमान के सामने एक बड़ा जोखिम पैदा कर रहा है।

चार साल बाद ब्याज दरों में की गई बढ़ोतरी

भारतीय रिजर्व बैंक ने 5 से 7 अक्टूबर के बीच आयोजित MPC बैठक के मिनट्स बुधवार को जारी किए। बैठक में गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत समिति के सभी छह सदस्यों ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 25 bps बढ़ाकर 5.5% करने के पक्ष में मतदान किया।

  • लंबी अवधि के बाद बदलाव: फरवरी 2023 के बाद यह पहला मौका है जब आरबीआई ने दरों में बढ़ोतरी की है। लगभग चार साल के लंबे अंतराल के बाद यह कदम उठाया गया है, जो केंद्रीय बैंक के पिछले 'दर-कटौती चक्र' (rate-cut cycle) से एक अलग रुख को दर्शाता है।
  • बदले हालात: देश की विकास दर उम्मीद से कहीं बेहतर बनी हुई है, लेकिन महंगाई का जोखिम एक बार फिर सिर उठा रहा है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर बने ब्याज दरों के माहौल के कारण भारत के लिए एक बड़ा पॉलिसी गैप बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा था।

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सख्त मौद्रिक नीति को झेलने में सक्षम है भारतीय इकोनॉमी

केंद्रीय बैंक को अब इस बात का पूरा भरोसा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था विकास दर पर कोई भी बड़ा नकारात्मक प्रभाव पड़े बिना, मौद्रिक सख्ती (monetary tightening) के इस दौर को आसानी से झेल सकती है।

MPC के मिनट्स के अनुसार, गवर्नर ने इस बात पर जोर दिया कि महंगाई के व्यापक होने के स्पष्ट संकेत मिलने लगे हैं:

  • अगस्त महीने में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) बास्केट में शामिल 37 प्रतिशत वस्तुओं में महंगाई 4 प्रतिशत से ऊपर दर्ज की गई।
  • तुलनात्मक रूप से देखें तो मार्च में यह आंकड़ा मात्र 20 प्रतिशत था, जो महंगाई के दायरे में विस्तार को साफ दिखाता है।

आगे क्या हैं उम्मीदें? (अगली पॉलिसी बैठकों का अनुमान)

वित्तीय विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई के दबाव को काबू में रखने के लिए नीतिगत दरों (Policy Rates) में और इजाफा देखने को मिल सकता है।

  • दिसंबर और फरवरी के अनुमान: कुछ प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों और विश्लेषकों का अनुमान है कि दिसंबर में होने वाली अगली पॉलिसी मीटिंग में एक बार फिर 0.25% (25 bps) की बढ़ोतरी की जा सकती है। इसके अलावा, फरवरी की नीतिगत समीक्षा में भी इतनी ही वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
  • इसका मतलब यह है कि आने वाली लगातार तीन पॉलिसी बैठकों में कुल मिलाकर 0.75% (75 bps) तक की कुल बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

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