बीकानेर (राजस्थान): सर्दियों के मौसम में पाले और शीत लहर के प्रकोप से नाजुक उद्यानिकी (बागवानी) फसलों को सुरक्षित रखने तथा किसानों को खेती की आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। राजस्थान के बीकानेर जिले में उद्यान विभाग द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत 'प्लास्टिक टनल' (प्लास्टिक लो-टनल) के उपयोग को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है।

लागत पर 50% अनुदान और सीमा की शर्तें

उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत के अनुसार, राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत फसलों में प्लास्टिक लो-टनल की स्थापना के लिए किसानों को विशेष छूट दी जा रही है:

  • अनुदान की दर: प्लास्टिक टनल की अनुमानित लागत ₹80 प्रति वर्गमीटर या अनुबंधित फर्म की दर—इन दोनों में से जो भी कम हो, उस पर 50 प्रतिशत तक अनुदान (सब्सिडी) दिया जाएगा।
  • अधिकतम सीमा: एक किसान को अधिकतम 2,000 वर्गमीटर क्षेत्र तक के लिए प्रोरेटा (अनुपातिक) आधार पर अनुदान राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
  • विशेष छूट: अनुसूचित क्षेत्रों (TSP Zones) के लिए लो-टनल की इकाई लागत 15 प्रतिशत अधिक निर्धारित की गई है।
  • पात्रता शर्त: ध्यान रहे कि जिन किसानों ने पूर्व में इस योजना का लाभ प्राप्त कर लिया है, उन्हें पुनः इस योजना में शामिल नहीं किया जाएगा।

10 हजार वर्गमीटर में प्लास्टिक टनल का लक्ष्य

अनुसंधान ग्राह्य परीक्षण केंद्र के उद्यान उपनिदेशक प्रेमाराम ने बताया कि जिले में विभिन्न श्रेणी के किसानों के लिए कुल 10,000 वर्गमीटर क्षेत्र में प्लास्टिक टनल स्थापित करने का भौतिक लक्ष्य तय किया गया है।

श्रेणीनिर्धारित लक्ष्य (क्षेत्रफल)
सामान्य श्रेणी के किसान8,000 वर्गमीटर
अनुसूचित जाति (SC) के किसान2,000 वर्गमीटर

क्या है प्लास्टिक टनल तकनीक और कैसे करती है काम?

प्लास्टिक टनल तकनीक में खेत की जमीन के ऊपर एक छोटी सुरंगनुमा (Tunnel-like) पारदर्शी संरचना तैयार की जाती है और पौधों को ढककर उगाया जाता है।

  • सुरक्षा कवच: यह तकनीक सर्दियों में भारी ठंड, पाले और प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों से पौधों की रक्षा करती है।
  • अनुकूल माहौल: इसके अंदर का तापमान और नमी नियंत्रित रहती है, जिससे शुरुआती अवस्था में पौधों की वृद्धि बहुत तेजी से होती है। यह तकनीक विशेष रूप से हरी सब्जियों और नाजुक बागवानी फसलों के लिए वरदान साबित होती है।

अगेती फसल से बढ़ेगी किसानों की आय

सहायक निदेशक मुकेश गहलोत ने बताया कि प्लास्टिक टनल तकनीक का सबसे बड़ा लाभ अगेती खेती (Early Farming) में मिलता है। टनल की मदद से किसान मौसम से पहले ही सब्जियों का उत्पादन शुरू कर सकते हैं। जब फसलें बाजार में सामान्य समय से पहले पहुंचती हैं, तो किसानों को उनके बेहतर और उच्च बाजार दाम मिलते हैं।

विभाग का मुख्य ध्येय आधुनिक तकनीकों को धरातल पर उतारकर किसानों की फसल उत्पादकता बढ़ाना और उनकी आय में स्थायी वृद्धि के नए अवसर उपलब्ध कराना है।

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