केंद्र सरकार ने 2031 तक 4% रखा महंगाई का लक्ष्य, RBI को मिली नीतिगत मजबूती

भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर और विश्वसनीय दिशा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगले पांच वर्षों (2026-2031) के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का लक्ष्य 4 प्रतिशत पर ही स्थिर रहेगा। यह फैसला न केवल बाजार को स्पष्ट संकेत देता है, बल्कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के लिए भी भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है।

26 Mar 2026  |  97

 

नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर और विश्वसनीय दिशा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगले पांच वर्षों (2026-2031) के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का लक्ष्य 4 प्रतिशत पर ही स्थिर रहेगा। यह फैसला न केवल बाजार को स्पष्ट संकेत देता है, बल्कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के लिए भी भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है।

महंगाई का नया ढांचा: 2% से 6% का 'सुरक्षा कवच'

25 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने रिजर्व बैंक के साथ परामर्श के बाद RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45ZA के तहत यह लक्ष्य निर्धारित किया है।

मुख्य लक्ष्य: 4 प्रतिशत।

ऊपरी सीमा (Upper Tolerance): 6 प्रतिशत (इससे अधिक होने पर चिंताजनक)।

निचली सीमा (Lower Tolerance): 2 प्रतिशत (इससे कम होना विकास के लिए धीमा संकेत)। यह ढांचा 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 31 मार्च 2031 तक प्रभावी रहेगा।

नीतिगत निरंतरता और MPC की भूमिका

भारत ने 2016 में पहली बार 'इन्फ्लेशन टार्गेटिंग' (महंगाई लक्ष्य निर्धारण) मॉडल अपनाया था। सरकार का यह ताजा फैसला 'नीतिगत निरंतरता' (Policy Continuity) का परिचायक है। इससे मौद्रिक नीति समिति (MPC) को ब्याज दरों (Repo Rate) के निर्धारण में आसानी होगी, क्योंकि उनके पास अगले पांच साल के लिए एक स्पष्ट बेंचमार्क मौजूद है।

वर्तमान स्थिति: नियंत्रण में है 'महंगाई का जिन्न'

फरवरी 2026 के आंकड़े बताते हैं कि देश में महंगाई फिलहाल सरकार के तय लक्ष्य (4%) से भी नीचे बनी हुई है:

कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI): 3.21%

खाद्य महंगाई (CFPI): 3.47% (सब्जियों जैसे टमाटर और मटर की कीमतों में 10% गिरावट के कारण राहत)।

शहरी बनाम ग्रामीण: शहरी क्षेत्रों में महंगाई 3.02% रही, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह 3.37% दर्ज की गई।

क्षेत्रीय भिन्नता: इन राज्यों में अधिक है बोझ

भले ही राष्ट्रीय औसत कम हो, लेकिन कुछ राज्यों में महंगाई का दबाव अभी भी अधिक देखा जा रहा है:

तेलंगाना

राजस्थान

केरल

आंध्र प्रदेश

पश्चिम बंगाल

डेटा की विश्वसनीयता: कैसे होता है आकलन?

सरकार महंगाई के इन आंकड़ों को जुटाने के लिए एक विशाल नेटवर्क का उपयोग करती है। इसके लिए देशभर के 1181 गांवों और 1114 शहरी बाजारों (कुल लगभग 2800+ केंद्रों) से डेटा एकत्र किया जाता है। फरवरी 2026 में लगभग 100% केंद्रों से डेटा संग्रह सफल रहा, जो इन आंकड़ों की सटीकता की पुष्टि करता है।

निष्कर्ष: विशेषज्ञों का मानना है कि 4% के लक्ष्य को अपरिवर्तित रखना निवेशकों और आम जनता के लिए सकारात्मक है। यह दर्शाता है कि सरकार मूल्य स्थिरता को लेकर गंभीर है, जिससे भविष्य में ब्याज दरों के कम होने की संभावना बनी रह सकती है। अब सभी की निगाहें 13 अप्रैल को जारी होने वाले मार्च के आंकड़ों पर टिकी हैं।

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